कैदियों ने एक दूसरे की गले मिल परिवर्तन की प्रक्रिया में एक दूसरे का साथ देने का संकल्प किया

प्रेषक का नाम :- आनंदम सहयोगी लखनलाल असाटी छतरपुर
स्‍थल :- Chhatarpur

 छतरपुर जिला जेल में रविवार 29 अप्रैल को अल्पविराम का चौथा सत्र कई मायनों में अभूतपूर्व रहा, 2 कैदियों ने खुद में परिवर्तन का संकल्प किया | आनंदम सहयोगी लखनलाल असाटी, मुख्य प्रहरी करुणेंद्र सिंह परिहार की उपस्थिति में मैहर के भागवत उपासक डॉक्टर प्रभु जी गौतम ने कैदियों को आत्मकल्याण के सूत्र दिए | उन्होंने सभी से आवाहन किया कि सभी कैदी नियमित रूप से खुद के लिए भगवान से प्रार्थना करें |
          एक किशोर कैदी ने अपने जीवन की कहानी सुनाते हुए बताया कि किस तरह वह एक छात्र से अपराधी बना, पर अब वह अपने आप को मजबूत करेगा, बुरे लोगों से दूर रहेगा और और जेल से निकलने के बाद अपने परिवार के साथ नई जिंदगी शुरु करेगा | एक अन्य कैदी ने कहा, कि वह सत्य के मार्ग पर चलने का प्रयास करेगा | सभी कैदियों ने 2 मिनट मौन रहकर ईश्वर से प्रार्थना की कि इन दोनों  का संकल्प पूरा हो|
      कैदियों ने स्वीकार किया कि जेल के अंदर और बैरक में ज्यादातर बदला लेने और आगे अपराध करने की ही बातें होती हैं जिस कारण परिवर्तन बहुत मुश्किल है, तब आनंदम सहयोगी लखनलाल असाटी ने दो प्रयोगों के माध्यम से कैदियों को प्रेरणा देने का प्रयास किया | मैले कपड़े से ढके एक सुंदर गमले को उनके सामने प्रस्तुत किया गया फिर इसकी तुलना उनके खुद के निर्मल स्वरूप पर ढकी बुराइयों से की गई, इसी तरह एक कैदी को पहले स्वतंत्र रूप से चलाया गया और फिर उसे पीछे से पपकड़ लिया गया  और तब कहा गया कि आगे चलो , तो उसे चलने में कठिनाई हो रही थी | कैदियों से कहा गया कि बुरे लोगों अथवा बुरे विचारों की जकड़न से तुम्हें स्वतंत्र होना है | इस पर कैदियों ने ही आपस में सुझाव दिए कि वह कुछ अच्छे कैदियों के साथ खुद में परिवर्तन की प्रक्रिया को तेज करेंगे और खुद में परिवर्तन लाएंगे भी|
 सभी कैदियों ने अंत में एक दूसरे की गले मिलकर इस नेक मिशन में एक दूसरे का साथ देने का संकल्प किया | सभी ने एक साथ भजन भी गाया


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