छतरपुर |अपनी आत्मा की आवाज सुन छह माह में अपनी बुराइयों पर नियंत्रण पाया

प्रेषक का नाम :- छतरपुर | आनंदम सहयोगी लखनलाल असाटी
स्‍थल :- Chhatarpur

छतरपुर | जिला जेल में शनिवार 28 अप्रैल को कैदियों के साथ लगातार तीसरे अल्पविराम सत्र को आनंदम सहयोगी लखनलाल असाटी ने रिटायर्ड एसएलआर श्री आर बी वर्मा तथा मुख्य प्रहरी श्री करुनेन्द्र सिंह परिहार के साथ सफलतापूर्वक संपन्न कराया | श्री परिहार और श्री वर्मा ने अपने अपने जीवन की पश्चाताप और परिवर्तन की कहानी सुनाई और लखनलाल असाटी ने फ्रीडम गिलास के माध्यम से अंदर की बुराइयों को बाहर करने का प्रदर्शन किया | 
श्री परिहार ने बताया कि नौकरी की शुरुआत में साथियों को देख कर उनके मन में भी लोभ और लालच बढ़ गया था, प्रभारी जेलर रह चुके श्री परिहार ने कहा कि पहले वह भी कैदियों को परिजनों से मिलाने का काम हो अथवा जेल के अंदर भोजन आदि व्यवस्था का काम हेा, सब में अपना स्वार्थ सोचा करते थे  परंतु अचानक उनके मन में विचार आया कि क्या यही उनकी नौकरी और उनके जीवन का उद्देश्य है?तो फिर उन्होंने छह माह तक शांत समय लेकर इस पर विचार किया और अपनी आत्मा की आवाज सुनी इन छह माह में उन्होंने अपनी बुराइयों पर पूरी तरह से नियंत्रण पा लिया| पर ईश्वर ने उन्हें एक ऐसी विशेषता प्रदान कर दी जो उनके जीवन को सदा आनंदित करती रहती है |जमीन के अंदर कहां पानी है, यह बता पाने की क्षमता उन्होंने इस 6 माह में विकसित की और आज स्थिति यह है, कि वह जहां भी पानी बता देते हैं नलकूप खनन पर भरपूर पानी निकलता है | वह मानते हैं कि उन्होंने जिस तरह से अपनी बुराइयों को त्यागा है, उसी के परिणाम स्वरुप ईश्वर ने उन्हें यह विशेषता प्रदान की है |
      श्री वर्मा ने अपने जीवन की कहानी बताते हुए कहा पन्ना जिले के खोरा ग्राम में जब वह स्कूल में पढ़ते थे, तो एक किसान से ककड़ी को लेकर उनका विवाद हो गया | उनके मन में बदले की भावना इतनी प्रबल हुई कि रात में जाकर उन्होंने उस किसान की ककडियां तो चुराई हीं, साथ ही साथ बहुत सारी फसल को समूल नष्ट कर दिया| पर कुछ दिनों बाद जब वह उस किसान के खेत पर गए तो उसकी गरीबी देखकर उन्हें बहुत दुख हुआ प्रायश्चित स्वरूप उन्होंने उसके खेत में कई दिनों तक पानी दिया और उसके बच्चों को पढ़ाया भी | उन्होंने किसान से सार्वजनिक रूप से माफी भी मांगी, इस भूल सुधार ने उनके जीवन का मार्ग सरल कर दिया और उन्हें सरकारी नौकरी भी मिल गई| 
आनंदम सहयोगी लखनलाल ने फ्रीडम गिलास के माध्यम से अपने अंदर की बुराइयों जैसे क्रोध, जलन, कठोरता, लालच, बदले की भावना आदि पर नियंत्रण की कहानी सुनाई और कहा कि अंदर की बुराइयों को साफ करने की प्रक्रिया आज भी अनवरत जारी है | कुछ कैदियों ने भी अपने अपने जीवन की सच्ची घटनाएं बताईं कि किस तरह उन्होंने क्षणिक आवेश अथवा लालच में आकर गलत कदम उठाकर अपने खुद के और परिवार के जीवन का आनंद समाप्त कर दिया | एक कैदी ने तो यहां तक बताया कि वह अपने परिवार के सदस्यों को समझाता रहा पर वे  नहीं माने और आज वह निर्दोष होते हुए भी परिवार के साथ जेल में हैं सभी कैदियों ने फिर भरोसा दिलाया कि वह एक दूसरे के लिए ईश्वर से प्रार्थना करते रहेंगे |


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