परोपकार कभी बेकार नहीं जाता छतरपुर जनपद के पीसीओ ने सुनाया अपना अनुभव

प्रेषक का नाम :- आनंदम सहयोगी लखनलाल असाटी छतरपुर
स्‍थल :- Chhatarpur

परोपकार कभी बेकार नहीं जाता
छतरपुर जनपद के पीसीओ ने सुनाया अपना अनुभव
      छतरपुर। आनंद विभाग की ओर से आनंदम सहयोगी लखनलाल असाटी ने छतरपुर जनपद पंचायत के सभाकक्ष में अल्पविराम कार्यक्रम संपन्न कराया। जिसमें ये मत कहो खुदा से मेरी मुश्किलें बड़ी हैं गीत के साथ अल्पविराम कार्यक्रम की शुरूआत की गई। दूसरों की मदद से ही जीवन में सच्चा आनंद प्राप्त होगा इस पर विचार विमर्श किया गया। थाई डॉक्टर की एक वीडियो क्लिप भी दिखाई गई और उसके बाद सभी ने 20 मिनिट मौन रहकर खुद के जीवन में किये गये परोपकार और दूसरों से मिली मदद पर अपनी आत्मा से साक्षात्कार का प्रयास किया गया।
अल्पविराम कार्यक्रम में जनपद सीईओ कुमारी प्रज्ञा भारतीय, विकास अधिकारी जीपी कुशवाहा, उपयंत्री रामप्रकाश गुप्ता, लिपिक पीके पाठक, बिहारी लाल कौंदर, रोहित आनंद, समय पाल, रामकुमार राजपूत, अजय गर्ग, उपयंत्री रजनी कोच्चेकर, केके दुबे, अंजू देवी अहिरवार, पारूल दुबे, आत्मानंद सिंह, एडीईओ जीतेन्द्र कुमार गुप्ता, पीके पटैरिया, रविन्द्र अग्निहोत्री, पीसीओ आशीष कुमार खरे, रामेश्वर प्रसाद यादव, अजय श्रीवास्तव, सत्यप्रकाश खरे, रामप्रसाद गंगेले, ऑपरेटर शोभना ताम्रकार तथा राजेश मिश्रा ने भाग लिया।
अल्पविराम के बाद सभी ने अपने-अपने विचारों को साझा किया। पीसीओ अजय श्रीवास्तव ने अपनी एक घटना का जिक्र करते हुए बताया कि छतरपुर में दो सडक़ दुर्घटनाओं में उनके खुद के द्वारा और उनके पुत्र के द्वारा घायलों की निस्वार्थ मदद व तुरंत चिकित्सा उपलब्ध कराई गई। परंतु घायलों के परिजनों द्वारा उन पर ही एक्सीडेंट कर देने का शक किया गया। तब वह काफी निराश हुए। परंतु कुछ ही समय बाद इंदौर में एमबीए कर रही उनकी बेटी का सडक़ एक्सीडेंट हो गया। परंतु ईश्वर की कृपा से पीछे आ रहे एक डॉक्टर ने उनकी बेटी को घटना स्थल से उठाकर अपने वाहन से अस्पताल ले जा कर भर्ती कराया और उसका इलाज कराया। बेटी को लगभग 24 घंटे बाद होश आया तब तक उन डॉक्टर ने उनकी बेटी की देखभाल की। खबर लगने पर वह इंदौर पहुंचे और सारी सच्चाई जानकर उनकी आत्मा ने उन्हें यह संदेश दिया कि उनके द्वारा दूसरों की जो मदद की गई थी उसी का प्रतिफल है कि इंदौर में एक अनजान डॉक्टर द्वारा उनकी बेटी की जान बचा ली गई। सभी को इस घटना से अत्यंत प्रेरणा मिली और सभी ने स्वीकार किया कि दूसरों की मदद लगातार करते रहना चाहिए।


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