दूसरों की मदद और परवाह करने से ही मिलेगा आनंद खुद अच्छा महसूस करने के लिए अच्छा करते रहना होगा

प्रेषक का नाम :- लखन लाल असाटी आनंदम सहयोगी छतरपुर
स्‍थल :- Chhatarpur
22 Jul, 2017

छतरपुर। जीवन में यदि हम खुद अचछा महसूस करना चाहते हैं तो हमें भी अच्छा करते रहना होगा। दूसरों की परवाह और मदद किए बगैर जीवन में आनंद की प्राप्ति नहीं हो सकती। आदिम जाति कल्याण विभाग में अल्पविराम से जुड़कर कर्मचारियों ने यह तथ्य स्वीकार किया। शासन के निर्देशानुसार अधिकारियों और कर्मचारियों को आनंद विभाग की ओर से आनंदम सहयोगी लखन लाल असाटी द्वारा अल्पविराम प्रशिक्षण दिया जा रहा है। आत्मा की आवाज सुनने का अभ्यास कर रहे कर्मचारियों ने स्वीकार किया कि दूसरों की मदद करने से ही उनके जीवन में आनंद आया है। ए.के नामदेेव ने कहा कि वह प्रतिदिन अपने पिछले दिन की गलतियों के लिए भगवान से क्षमायाचना करते हैं और भविष्य में गलती न हो इसका प्रयास करते हैं। विनोद सक्सेना ने कहा कि स्वास्थय विभाग के एक कर्मचारी की मौत के बाद उन्होंने उसकी व्यक्तिगत और शासन स्तर से मदद कराई थी। जिस कारण वह परिवार उनके प्रति अपार सम्मान रखता है। इसी तरह कार्यालय के अस्थाई कर्मचारी महेश सिंधी की गंभीर बीमारी में इलाज हेतु सभी ने मिलकर मदद की जिस कारण यह कर्मचारी आज पूरी तरह स्वस्थ है। प्रेम सिंह ने कहा कि वह अपने गृहग्राम सागर जिले की खुरई तहसील के लिधौरा धाम में 26 कन्याओं का विवाह अपने खर्चे से करा चुके हैं। कार में जरूरतमंदों के लिए भोजन और कपड़े लेकर चलते हैं क्षेत्र संयोजक डॉ. नारायण ङ्क्षसह ने कहा कि आनंद विभाग की प्रेरणा के बाद उनके जीवन में सकारात्मकता बढ़ी है। अब वे जब भी अपनी कार से यात्रा पर निकलते हैं तो उनकी कार में जरूरतमंदों के लिए नए कपड़े और कम से कम दो लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था होती है। राह चलते उन्हें जो भी असहाय और गरीब दिखता है उसे अपने सामने कपड़े पहनाते हैं और भोजन कराते हैं। इस कार्य से उन्हें अत्यंत आनंद प्राप्त होता है। जिला संयोजक मोहित भारती, श्रीमती वर्षा पटेल, जेपीएस चौहान, अशोक चौरसिया, केएल अहिरवार आदि ने भी अपने जीवन के उन अनुभवों को सुनाया जब उनकी किसी ने मदद की थी। श्रीमति वर्षा पटेल ने कहा कि यदि एक वकील ने उनकी मदद न की होती तो आज वह इस मुकाम पर न होतीं। सभी अधिकारियों, कर्मचारियों ने स्वीकार किया कि उनके जीवन में आनंद के पीछे बहुत सारे लोगों का योगदान है इसलिए उनका भी यह दायित्व बनता है कि वे भी दूसरों की मदद करें।


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