• आनंद शिविर प्रशिक्षण तथा अल्पविराम कार्यक्रम के रजिस्ट्रेशन की जानकारी के लिए क्लिक करें          • आनंद प्रोजेक्ट एवं फ़ेलोशिप के लिए आवेदन आमंत्रित है, आवेदन करने की अंतिम तिथि 31 दिसम्बर 2018 तक बढ़ा दी गई है |

जन्म से दिव्यांग मूकबधिर कन्या का विवाह करा कर लिया आनंद।

प्रेषक का नाम :- लखन लाल असाटी आनंदम सहयोगी जिला छतरपुर।
स्‍थल :- Chhatarpur
26 May, 2017

छतरपुर। कलेक्टर श्री रमेश भंडारी के निर्देशन एवम् अपर कलेक्टर श्री दिनेश कुमार मौर्य के मार्गदर्शन में संचालित आनंद विभाग की गतिविधियों से जुड़कर शिक्षा विभाग के एक कर्मचारी ने आनंद की खोज में एक ऐसा उत्कृष्ट कार्य संपादित कराया,जिससे एक दिव्यांग कन्या की गृहस्थी बस गई वहीं उसके परिवार को भी स्थाई आनंद की सदा अनुभूति होने लगी। आनंदम सहयोगी लखन लाल असाटी ने छतरपुर जिले में प्रयोग के तौर पर पहला अल्पविराम 4 जनवरी 2017 को जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में कराया था। कार्यालय में कोई हॉल न होने से कार्यक्रम खुले मैदान में आयोजित हुआ था। इसमें सम्मिलित हुए लिपिक श्री अनिल कुमार पटैरिया ने उसी दिन से अपने जीवन मे आनंद की खोज शुरू कर दी। कुछ दिनों पश्चात उन्हें अपने संबंधी रामरतन तिवारी धमोरा के घर जाने का संयोग बना।कृषक श्री तिवारी की अविवाहित दिव्यांग कन्या रेशु का विवाह नहीं हो पा रहा था क्योंकि वह जन्म से ही मूक और बधिर थी। तिवारी परिवार इस कारण सदा तनाव और दुःख में डूबा रहता था। कि क्या वह अपनी इस मासूम लाडली बेटी की व्यवस्था अपने जीते जी कर पाएंगे। तब श्री अनिल ने निश्चय किया कि वह दिव्यांग कन्या का विवाह कराएंगे। उन्होंने वर की खोज शुरू की,जो कुछ माह बाद लवकुशनगर तहसील के टहनगां गांव में जाकर पूर्ण हुई। नवयुवक राजेश पाठक जो कि दुकानदार हैं के माता पिता से बातचीत की गई। फिर राजेश को सबकुछ बताया गया। अनिल पटैरिया के छतरपुर स्थित सरकारी आवास H-6 कृषि कॉलोनी से वर वधु का आपस में परिचय कराया गया। दोनों की सहमति के बाद 7 मई 2017 को धमोरा ग्राम में धूमधाम से विवाह संपन्न हुआ। विवाह के बाद अनिल अपनी पत्नी ममता पटैरिया के साथ रेशु की ससुराल भी होकर आए जहां नवदम्पति बड़ी सहजता से सानंद अपना वैवाहिक जीवन जी रहे हैं। 24 मई 2017 को जब जिला शिक्षा केंद्र में लखन लाल असाटी ने पुनः अल्पविराम सम्पन कराया तो यह कहानी सामने आयी। पटैरिया दंपति ने बताया की उन्हें जीवन में सचमुच सच्चे आनंद की अनुभूति अब हुई है। और यह आनंद उनके जीवन की अक्षय सम्पति बन गया है। आनंद विभाग की गतिविधियों से समाज में सकारात्मक सोच बड़े,यही उनकी मंगलकामना है।


फोटो :-

         

डाक्‍यूमेंट :-

Document - 1