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मामा की मदद से बना डॉक्टर,बच्चों के लिए एमएस की पढ़ाई अधूरी छोड़ी : डॉ भगवान सिंह 

प्रेषक का नाम :- लखन लाल असाटी छतरपुर जिला संपर्क व्यक्ति राज्य आनंद संस्थान
स्‍थल :- Chhatarpur
27 Mar, 2021

मामा की मदद से बना डॉक्टर,बच्चों के लिए एमएस की पढ़ाई अधूरी छोड़ी : डॉ भगवान सिंह सॉफ्ट स्किल ट्रेनिंग के तहत राज्य आनंद संस्थान द्वारा प्रदेश के हेल्थ वर्कर्स को अल्पविराम कार्यक्रम से परिचित कराया जा रहा है इसी श्रंखला में अशोकनगर जिले के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों हेतु 23 से 25 मार्च 2021 तक ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न कराया गया संस्थान के सीईओ श्री अखिलेश कुमार अर्गल ने आनंद की अवधारणा की जानकारी देते हुए कहा कि संस्थान के वॉलिंटियर्स आनंद का मार्ग दिखा सकते हैं पर चलना इसमें आपको ही पड़ेगा मास्टर ट्रेनर लखनलाल असाटी छतरपुर,संजय श्रीवास्तव विदिशा,बलवीर सिंह बुंदेला अशोकनगर,कडवा मंसारे खरगोन तथा दीप्ति उपाध्याय ग्वालियर ने विभिन्न सत्रों, शांत समय और अपने व्यक्तिगत अनुभवों के माध्यम से आनंद की अवधारणा को और अधिक स्पष्ट कियाप्रतिभागियों में डॉ भगवान सिंह ने बताया कि उनकी जीवन में बहुत लोगों ने मदद की, वह अपने मामा की मदद से ही डॉक्टर बन पाए हैं और वह भी अब सभी की मदद करने तत्पर रहते हैं मैंने अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए मास्टर ऑफ सर्जरी की पढ़ाई एक माह बाद छोड़ दी थी,मेरी बेटियां मेरे लिए बहुत भाग्यशाली साबित हूुईं मेरे दो बेटेऔर तीन बेटियां सभी उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं बेटी एमटेक, बेटा एमबीबीएस और साले की बच्ची भी एमबीबीएस कर रही है उन्होंने कहा कि वह मुरैना जिले की अंबाह तहसील के हैं जहां सन 81 में सिर्फ दो ही डॉक्टर थे जिनमें से एक मैं था, उन्होंने कहा कि वह प्रदूषण पर्यावरण और मिलावट को लेकर बहुत चिंतित रहते हैं डीपीएम दीपक सिसोदिया ने कहा कि वह भी समाज को लेकर चिंतित रहते हैं जिज्ञासा साहू ने कहा कि कोरोना में जितना अधिक पैसा देश का खर्च हुआ है यदि वह विकास में होता तो बेहतर होता है उन्होंने कहा कि वह अपने भाइयों के स्वभाव को और अधिक मधुर बनाना चाहती हैं डॉक्टर जसराज ने कहा कि उन्होंने स्टाफ की एक लड़की को अपनी बेटी मान लिया है अब उन्हें उसकी शादी ब्याह की चिंता रहती है वह अपनी पारिवारिक एकता को बनाए रखना चाहते हैं गांव में शिक्षा की जगह नशा की प्रवृत्ति बढ़ गई है लोग एक दूसरे का सम्मान नहीं करते वह गांव में निशुल्क स्कूल चला रहे हैं और निशुल्क ट्यूशन भी डॉ रजनी क्षारी ने कहा कि वह सदा पॉजिटिव एनर्जी रखती हैं अन्य प्रतिभागियों ने भी अपने जीवन के अनुभव सुनाए और कहा कि शांत समय में उन्हें गहरी प्रेरणा दी है और वह शांत समय का नियमित अभ्यास भी करेंगे


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