• ऑनलाइन कौर्स : ए लाइफ ऑफ़ हैप्पीनेस एंड फुलफिल्मेंट

प्रकृति के नजदीक हुए, दया और करुणा की हृदय में जगह बढी

प्रेषक का नाम :- मास्टर ट्रेनर एवं अतिरिक्त नोडल अधिकारी लखन लाल असाटी छतरपुर
स्‍थल :- Chhatarpur
29 May, 2020

छतरपुर, राज्य आनंद संस्थान के ऑनलाइन अल्पविराम को लोगों ने पसंद किया और बताया कि खाली समय का उपयोग उन्होंने रचनात्मक गतिविधियों और सकारात्मक कार्यों में किया है अल्पविराम शिविर समन्वयक लखन लाल असाटी ने आशा असाटी छतरपुर, समीरा नईम देवास, रमेश कुमार व्यास व उषा व्यास दमोह, कड़वा मंसारे खरगोन, मुकेश बिले भोपाल के साथ विभिन्न सत्रों का संचालन कियातीसरे चरण के समापन सत्र में संस्थान के सीईओ अखिलेश कुमार अर्गल ने कहा कि समुद्र में लहरें उठ रही हो तो उसकी तलहटी को नहीं देखा जा सकता है पर जब वह शांत हो तो हम उसके अंदर झांक सकते हैं शांत समय खुद में झांकने का अवसर प्रदान करता है संस्थान का काम आनंद का मार्ग दिखाना है चलना तो व्यक्ति को खुद पड़ेगाछतरपुर से सरस्वती प्रसाद तिवारी ईशा नगर,कृष्णपाल सिंह परिहार ललौनी, नीरज श्रीवास सौंरा ने शांत समय से आए बदलावों को साझा किया छतरपुर के ही एडवोकेट संजय शर्मा ने मानसिक दिव्यांगों के लिए किए जा रहे कार्यों को बतलायाबालाघाट के हेमेंद्र छीरसागर,भोपाल के मुकेश गर्ग, शुजालपुर की अभिलाषा श्रीवास्तव, इंदौर की करुणा मस्तकर, मंदसौर के अंकुश मंडलोई, खरगोन के प्रीतेश अग्रवाल, रतलाम की अंजू सूर्यवंशी ने बताया कि लॉक डाउन पीरियड में उन्होंने किस तरह खुद को अनेक रचनात्मक कार्यों में जोड़ा*गणित टीचर की मदद से आज बनी गणित लेक्चरर* प्रतिभागियों ने बताया कि उनके पिता के ना होने पर किस तरह बड़े भाई, मौसी और अन्य परिजनों ने मदद की, अंजली सिंह रीवा ने बताया कि शादी के पहले किचन का कोई काम ना आने के बावजूद ससुराल में सास ने मदद की, रिंकी वर्मा ने बताया कि उनकी आर्थिक स्थिति खराब होने पर उन्हें प्राइवेट स्कूल से हटाकर सरकारी स्कूल में परिजनों ने दाखिला दिलाया था पर वहां गणित की टीचर ने उनकी इतनी अधिक मदद की कि आज वह खुद गणित की लेक्चरर हैं सरस्वती प्रसाद तिवारी ने कहा कि पिता के ना होने पर उनके बड़े भाई ने उनकी शिक्षा पूरी कराई और आज वह उच्च श्रेणी शिक्षक हैं उज्जैन की अमिता भोसले ने बताया कि पापा के नहीं होने के बाद लोगों ने मदद की जिस कारण वह आज वह बैहर बालाघाट कॉलेज में प्रोफेसर हैंअल्पविराम में सभी ने कहा कि जीवन का आनंद पाने के लिए कृतज्ञता का भाव बहुत जरूरी है जिसने मदद की है उसके प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करनी है लोगों की मदद करते रहनी है जिनसे दुख पहुंचा है उन्हें क्षमा करना है और जिनको दुख दिया है उनसे क्षमा मांगनी है राज्य आनंद संस्थान जून माह में भी ऑनलाइन अल्पविराम कार्यक्रम आयोजित करने हेतु विचार कर रहा है


फोटो :-

   

डाक्‍यूमेंट :-

Document - 1