• ऑनलाइन कौर्स : ए लाइफ ऑफ़ हैप्पीनेस एंड फुलफिल्मेंट

"लगता है,ज़रा सी ज़िंदगी मे व्यवधान बहुत है ,पर हम खुद ही बनाते है, पेंचीदा ज़िंदगी को ,यूँ तो जीने के नुस्खे आसान बहुत हैं।"

प्रेषक का नाम :- विजय मेवाड़ा कार्यक्रम समन्वयक अरविंद शर्मा समन्वयक इंदौर
स्‍थल :- Indore
20 Jan, 2020

राज्य आनंद संस्थान द्वारा जिला पंचायत सभाग्रह में आनंदम अल्पविराम कार्यक्रम का आयोजन किया गया जो अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी की उपस्थिति में सम्पन्न हुआ जिसमे ग्राम पंचायतों के सचिव एवम स्वयम सेवक उपस्थित रहे। सर्वंप्रथम राज्य आनंद संस्थान के परिचय के साथ संचालित कार्यक्रमों से परिचय कराते हुए कहा मुझे लगता है इस भागदौड़ भरी ज़िंदगी मे थोड़ा ठहराव आये, विचारों की उथल पुथल कम हो मन की शांति मिले, यह शायद आप मे से अधिकतर लोगों की आवश्यकता होगी।इसी लक्ष्य को पाने की युक्ति है "अल्पविराम" 30 सेकेंड ताली से सभी को एकाग्र कर 10 मिनिट का विराम दे प्रश्न पर अपने ध्यान को केंद्रित किया- क्या आप अपने जीवन से संतुष्ट हैं?एक पंचायत सचिव ने प्रश्न किया-भाग दौड़ ओर कामकाज से जीवन नीरस से हो गया है इसका कैसे आनंद लिया जाये?तत्पशचात आनंद मूवी का एक सीन प्रदर्शित हुआ।एवम आनंदम सहयोगी विजय मेवाड़ा ने सभी को उदाहरण से स्पस्ट“आप किसी भी चीज़ का पूरा आनंद तभी उठाते हैं जब आपको ये पता लगे कि ये चीज़ मेरी नहीं हैं और मुझसे दूर होने वाली हैं, तो आप क्या करते हो , आप सोचते हो अरे यह कुछ ही समय के लिए मेरे पास है, इसको एंजॉय कर लू जितना हो सके इसका आनंद लूं,, होता हैं ना ऐसा ? इसी तरह जब हम अपने जीवन का शाश्वत सत्य जान लेंगे कि हम अमर नही हैं, हम कभी भी एक दूसरे से बिछुड़ सकते हैं या ये जीवन कभी भी ख़त्म हो सकता है तो हम उन पलो को और जीवन को एंजॉय करना शुरू कर सकते हैं। ।इसलिए समय की क़ीमत करना शुरू करें । सबके लिए अच्छा सौंचे, स्वाभाव और व्यवहार के तौर तरीक़ों में बदलाव आ जाएगा । अंत मे निलेश तिवारी एवम अरविंद शर्मा द्वारा एक गीत ज़िंदगी हंसने गाने के लिए है पल दो पल।...गा कर प्रशिक्षण को सार्थक किया।


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