छतरपुर,किसी को दुखी करके कोई आनंदित नहीं रह सकता :  कमिश्नर श्री मनोहर दुबे

प्रेषक का नाम :- आनंदम सहयोगी मास्टर ट्रेनर लखनलाल असाटी छतरपुर,
स्‍थल :- Chhatarpur
12 Apr, 2019

किसी को दुखी करके कोई आनंदित नहीं रह सकता :  कमिश्नर श्री मनोहर दुबे  छतरपुर, किसी को दुखी करके कोई आनंदित नहीं हो सकता. इसी तरह हमारे चारों ओर के लोग अगर दु:खी हैं तो भी हम कभी आनंदित नहीं रह सकते हैं.अब आप तय कर सकते हैं कि यदि  खुद आनंदित रहना है तो आपको क्या करना होगा. यह उद्गगार कमिश्नर श्री मनोहर दुबे ने सागर संभाग के सीनियर अधिकारियों एवं मेडिकल ऑफिसर्स के साथ आयोजित तीन दिवसीय आवासीय अल्पविराम कार्यक्रम के समापन सत्र में व्यक्त किए.           कमिश्नर श्री दुबे ने कहा कि जीवन में हम करते कुछ हैं, पर चाहते कुछ और हैं. आनंदित रहने का मतलब कर्तव्य का परित्याग नहीं है. कोई भी व्यक्ति बिना काम किए नहीं रह सकता है. यही मानव का मूल स्वभाव है. कल्पना कीजिए यदि किसी व्यक्ति से सारे काम छीन लिए जाए और उसे एकांत बैठा दिया जाए तो उसकी स्थिति क्या होगी. जरूरत सिर्फ इस बात की है कि मैं ही श्रेष्ठ हूं इस भाव को हटाकर काम करें जब हम सच्चे रूप में खुद के आनंद के लिए काम करने लगेंगे तो समाज आनंदित स्वमेव हो जाएगा.  क्योंकि जब व्यक्ति खुश होता है तो वह सर्वाधिक सफल और श्रेष्ठ कार्य करता है, कमिश्नर श्री दुबे ने कहा कि संसार में हर उपकरण का कोई ना कोई मैन्युअल जरूर है जिसे हम पढ़ कर उस पर अमल करते हैं. बस समझ लीजिए इस मानव रूपी उपकरण का मैनुअल अल्पविराम है, इसलिए अल्पविराम को समझना और उस पर अमल करना आपके जीवन को आनंदित और सफल बना देगा.  सत्र का संचालन मास्टर ट्रेनर लखनलाल असाटी ने किया. इनीशिएटिव आफ चेंज पंचगनी केंद्र के सिद्धार्थ सिंह एवं किरण गांधी ने दमोह के मास्टर ट्रेनर रमेश कुमार व्यास एवं राज्य आनंद संस्थान भोपाल के ट्रेनर मुकेश करूवा छतरपुर से प्रदीप सेन के साथ विभिन्न प्रयोगों के माध्यम से अल्पविराम का प्रशिक्षण दिया. जिला पंचायत सीईओ श्री हर्ष दीक्षित ने कहा कि अल्पविराम मैं से हम की ओर ले जाता है उन्होंने उदाहरण देकर कहा कि जब कोई सीनियर अधिकारी खुद गलती करता है  तो उसे वह जस्टिफाई कर लेता है  पर उसके जूनियर से कोई गलती हो जाती है तो उसे जस्टिफाई नहीं होने देता है. यह अनुभव अल्पविराम ही कराता है. उन्होंने कहा कि हम बहुत सारे मानसिक बोझ हटाकर अच्छा काम कर सकते हैं. और बेहतर उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं. श्रीमती वागीशा द्विवेदी दीक्षित ने कहा कि जीवन में बहुत सारी परिस्थितियों में हम असहज महसूस करते हैं,व्यस्तताओं का हवाला देते हुए  उनसे जूझते रहते हैं और कैसे भी उनसे बाहर भी निकलते हैं. पर यदि अल्पविराम का सहारा लेंगे तो असहज परिस्थितियों से पार पाना अधिक आसान होगा. बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज सागर के डीन डॉ गिरीश पटेल ने कहा कि अल्पविराम खुद से जुड़ने का कार्यक्रम है, श्रीमती मधुलिका पटेल ने कहा कि अल्पविराम एक तरह से ट्रैफिक सिगनल्स है जहां हमें कुछ देर के लिए जरूर ठहरना चाहिए.  दमोह के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ आरके बजाज ने कहा कि बदलाव की शुरुआत खुद से होगी. हम बड़े लोगों से क्षमा मांगने में तो तत्पर है पर अल्पविराम छोटों से क्षमा मांगना सिखाता है, और यदि यह हमने सीख लिया तो कार्यक्षेत्र में आशातीत सफलता जरूर मिलेगी. *ज्वाइंट डायरेक्टर हेल्थ सागर डॉ संतोष जैन ने कहा कि उन्होंने अल्पविराम से सीखा जिसका जितना त्याग उतना उसको महत्व सोल नर्चर सेशन से उन्होंने अनुभव किया जितने हम प्रकृति के निकट होंगे उतने ही बीमारियों से दूर होंगे छतरपुर डीपीएम राजेंद्र खरे ने कहा कि अल्पविराम सच बोलने की ताकत देता है पन्ना डीपीएम श्रीमती ज्योति मंडलोई ने कहा कि अल्पविराम विभागीय प्रशिक्षण में अनिवार्य किया जाना चाहिए सीएमएचओ छतरपुर डॉ वीएस वाजपेई ने कहा कि अल्पविराम उग्रता से बचाता है मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसर डॉ पिप्पल ने कहा कि अल्पविराम  दूसरों के लिए सोचने और खुद में सुधार करने की प्रेरणा देता है जीवन में हर जगह  खुद की जीत के लिए ही  काम नहीं करना चाहिए.प्रोफेसर डॉ श्रीमती सुषमा पिप्पल ने कहा कि अल्पविराम खुद के प्रति ईमानदार होने की प्रेरणा देता है  संयुक्त कमिश्नर डॉ राजेश राय ने कहा कि अल्पविराम से जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं टीकमगढ़ सीएमएचओ डॉ वर्षा राय मेडिकल कॉलेज के डॉ गौरव अग्रवाल डॉ रूपा अग्रवाल डॉ उमेश पटेल श्रीमती अंजना खरे छतरपुर आदि ने भी अपने अपने विचार व्यक्त किए.


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