सागर कमिश्नर ने मंगल ग्रामों के सरपंच, सचिव और रोजगार सहायकों से किया संवाद,                                        

प्रेषक का नाम :- आनंदम सहयोगी मास्टर ट्रेनर लखनलाल असाटी
स्‍थल :- Chhatarpur
15 Feb, 2019

भौतिक कुशलता के साथ-साथ आंतरिक कुशलता  समान रूप से है जरूरी : कमिश्नर श्री दुबे कमिश्नर ने मंगल ग्रामों के सरपंच, सचिव और रोजगार सहायकों से किया संवाद,                                         अल्पविराम में शामिल हुए छतरपुर जिले की 11 मंगल ग्राम पंचायतों के सरपंच, सचिव और रोजगार सहायक     छतरपुर, सागर कमिश्नर श्री मनोहर दुबे ने कहा है कि दुनिया भर में पिछले एक शताब्दी में बहुत ज्यादा उन्नति के साथ-साथ साधन भी बढ़े हैं, पर पहले की तुलना में व्यक्ति के जीवन में झगड़े, अपराध और तनावों की बेतहासा वृद्धि हुई है। इन सभी से निजात दिलाने के मकसद से अल्पविराम का कार्य हाथ में लिया गया है। श्री दुबे आज जिला पंचायत के सभाकक्ष में मंगल ग्राम संवाद में अल्पविराम की अवधारणा को बता रहे थे।  कमिश्नर श्री दुबे ने बताया कि व्यक्ति के परिपूर्ण जीवन में भौतिक कुशलता के साथ-साथ आंतरिक कुशलता भी समान रूप से जरूरी है। अक्सर ऐसा देखा गया है कि आम व्यक्ति अंतर्मन की बजाय सुविधा के आधार पर निर्णय करता है, जिसके फलस्वरूप स्वयं के जीवन में और समाज में तनाव के लक्षण दिख रहे हैं।  श्री दुबे ने अल्पविराम में शामिल हुए छतरपुर जिले की 11 मंगल ग्राम पंचायतों के सरपंच, सचिव और रोजगार सहायकों को अल्पविराम की विशेषताओं को साझा करते हुए बताया कि अल्पविराम का इस मिशन का वास्ता सरकारी कार्यक्रम से न होकर शुद्ध रूप से व्यक्तिगत है। एक व्यक्ति को अपने स्वयं से प्रश्न, चिंतन मनन कराता है कि क्या सही है, क्या गलत है। अच्छा-बुरा करने वाले व्यक्ति को स्वयं पता रहता है कि उसके द्वारा किए जाने वाला कार्य अच्छा या बुरा है, पर करता वही है जो रूचिकर लगता है। बिना सोचे-समझे किए गए कार्यों का परिणाम भयावह होता है पर अंतर्मन से विचार करने से इन सभी से छुटकारा मिल सकता है। इन सभी पहलुओं को आज के सत्र में मास्टर ट्रेनर और टीम के अन्य सदस्यों द्वारा साझा किया जाएगा।  कमिश्नर श्री दुबे ने समाज में युवा वर्ग या अन्य वर्ग के व्यक्तियों द्वारा आत्महत्या के कारणों को साझा करते हुए बताया कि व्यक्ति को जीवन में सफलता के मंत्र अथवा इसे कैसे पाया जा सकता है, पर फोकस किया जाता है, पर असफलता की ट्रेनिंग न दिए जाने के कारण तनाव में आत्महत्या जैसे जघन्य कृत्य कर डालते हैं। अल्पविराम के जरिए इन सभी से छुटकारा पाया जा सकेगा।  जिला पंचायत सीईओ हर्ष दीक्षित ने अपेक्षा की कि इस कार्यक्रम में शामिल ग्राम पंचायत सरपंच, सचिव और रोजगार सहायक यहां से सीखकर अपनी-अपनी ग्राम पंचायतों के ग्रामों में इस मिशन का विस्तार करेंगे।  अल्पविराम के मास्टर ट्रेनर लखन असाटी ने बताया कि उनके दल द्वारा पिछले तीन दिनों में देरी, पठापुर और ललौनी में अल्पविराम का कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें ग्रामीणजनों द्वारा सक्रिय रूप से भागीदारी करने के साथ ही उत्साहजनक परिणाम मिले हैं। ग्राम पंचायत के कौशलेन्द्र सिंह चंदेल ने अपने अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि अल्पविराम की वजह से ही उनके जीवन में बदलाव आया है। अपर कलेक्टर डी.के. मौर्य और अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कमलेश पुरी भी मौजूद थे।  इसके पहले सागर कमिश्नर श्री मनोहर दुबे ने बुधवार की रात्रि में सर्किट हाउस में स्वैच्छिक संस्थाओं, डाक्टर समाजसेवी के समूह से अल्पविराम की गतिविधियों से रू-ब-रू कराया। उन्होंने बताया कि यह कार्यक्रम खुद को स्वयं से जुड़ना बताता है, फिर समूह और ग्राम से जुड़ा जा सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पहले व्यक्ति को स्वयं का विकास करना चाहिए और स्वयं सुखी रहने के लिए आसपास के सभी लोग खुश रहें तभी सही मायनों में सुखी रह सकते हैं।  इस अवसर पर कलेक्टर श्री मोहित बुंदस, अन्य जिला अधिकारी मौजूद थे। 


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