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*अल्पविराम ने हमें आनंद का प्रेसिडेंट बना दिया है*  शिक्षकों ने फालोअप प्रोग्राम में किए विचार साझा    

प्रेषक का नाम :- आनंदम सहयोगी लखनलाल असाटी
स्‍थल :- Chhatarpur
28 Oct, 2018

छतरपुर,बड़ा मलहरा जनपद पंचायत के सभाकक्ष में  बक्सवाहा एवं बड़ा मलहरा विकासखंड के 30 शासकीय शिक्षकों को अल्पविराम कार्यक्रम का फालोअप प्रशिक्षण दिया गया, इन शिक्षकों को पिछले माह नौगांव के डाइट में तीन दिवसीय आवासीय अल्पविराम प्रशिक्षण दिया गया था। छतरपुर जिले के मास्टर ट्रेनर लखनलाल असाटी ने प्रेरणादायक प्रार्थना और 15 मिनट का शांत समय देने के बाद  पिछली ट्रेनिंग में उन्होंने जो खुद के नाम पाती लिखी थी, कि वह खुद में, अपने परिवार में, और अपने स्कूल में क्या परिवर्तन लाना चाहते हैं, के बारें में उनसे अपने विचारों को साझा करने को कहा कि क्या वह एक माह में कुछ कर पाए हैं।  शिक्षकों ने इस बावत जो शेयर किया वह अत्यंत रोमांचित कर देने वाला था, महुटा के दुर्गा प्रसाद अहिरवार ने कहा कि अब उन्हें काम बोझ नहीं लगता, मन की झिझक समाप्त हुई. राम अवतार अहिरवार देवपुर ने कहा कि 10-11 छात्र उनके घर में अल्पविराम करने लगे हैं, बड़ा मलहरा के हरिशंकर मिश्र ने कहा कि हस्ताक्षर कर स्कूल से जाने की प्रवृत्ति समाप्त हो गई है, धनगुवां के लोकेश सिंह ने कहा कि परिवार के रिश्ते सुधार लिए, रामटौरिया के राजेंद्र प्रसाद तुरकर ने कहा कि प्रशिक्षण ने उनकी आत्मा को झकझोर दिया था, अब स्कूल में आनंद के साथ पढ़ाई होती है जिससे उपस्थिति भी बढ़ी है.  टोरिया के राकेश असाटी ने कहा कि वह स्कूल नियमित और समय पर जाने लगे हैं, पहले वह साथियों को देखा करते थे कि वह समय पर जाते या नहीं, दरगुवां के हरिओम श्रीवास्तव  ने कहा कि अब तक 15% सुधार हो चुका है राम नरेश शुक्ला धनगुवां ने कहा कि उन्होंने जिन चीजों के त्याग का संकल्प लिया था वह पूरा कर लिया है संस्था में धनगुआ एवं मदनीबार गांव के छात्रों के बीच भारी संघर्ष और तनाव को उन्होंने अल्पविराम के माध्यम से समाप्त कराया और सभी छात्र एक दूसरे के मित्र हैं। बाबूलाल अवस्थी बराज ने कहा कि अल्पविराम का उपयोग कर वह अपनी आत्मा को रोज रिफ्रेश करते हैं आज ही वह प्रशिक्षण के पहले अपने स्कूल की साफ सफाई खुद करके आ रहे हैं अब वह रविवार को भी स्कूल में काम करते हैं, स्कूल के बच्चों की कैबिनेट अब कागजी नहीं है. बमनकोला के संतोष सिंह बुंदेला ने कहा कि वह  रोज 10 -10 मिनिट शांत समय लेते हैं, पहले वह नींद की गोली खाकर सोते थे तब भी रात 1 बजे के बाद नींद नहीं आती थी अल्पविराम से सारा टेंशन समाप्त हो गया है और वह रात भर चैन की नींद सोते हैं उन्होंने तो गांव के अभिभावकों को बुलाकर संस्था में अल्पविराम कराना शुरू कर दिया है छात्रों पर  सकारात्मक प्रभाव हुआ है आज भी वह रिश्तेदारी में एक जरूरी पारिवारिक कार्यक्रम होने के बावजूद अल्पविराम के इस कार्यक्रम को नहीं छोड़ सके, सतपारा के राम किशोर उपाध्याय ने कहा कि अब वह दूसरों की बात मानने लगे हैं अपनी बात मनवाना छोड़ दिया है 20 साल की नौकरी में अब जाकर बच्चों के साथ बैठकर दिल की बात करता हूं, उन्होंने इस कार्यक्रम से प्रत्येक शाला को जोड़ने की जरूरत बताई।केरवारा की श्रीमती कीर्ति जैन ने कहा कि वह ₹100 प्रतिमाह स्कूल के बच्चों पर खर्च करने लगीं है कभी रंगोली तो कभी कोई अन्य चीज, बच्चों में भेदभाव खत्म करने के लिए जब उन्होंने वंशकार के बच्चे को खुद गले लगाया तो सारे बच्चे एक दूसरे से गले लग कर खूब रोए   बक्सवाहा की श्रीमती ममता संसिया ने कहा कि उन्हें शादी को 27 साल हो गए हैं इस अल्पविराम कार्यक्रम के बाद उनके पूरे परिवार का आनंद बड़ा है गुगवारा की रेखा ठाकुर ने कहा कि उन्होंने अपनी पारिवारिक वैमनस्यता को खत्म कर दिया है संस्था के दो होनहार अहिरवार समाज के बच्चे प्राइवेट स्कूल जाने लगे थे अल्पविराम के बाद उन्होंने अभिभावकों से मिलकर उन्हें वापस सरकारी स्कूल लाया है और भरोसा दिलाया कि हम प्राइवेट स्कूल से भी अच्छी पढ़ाई करेंगे ।   सेंधपा की श्रीमती अर्चना शुक्ला ने कहा कि अब बच्चों को डराना बंद कर दिया है उनका आत्मविश्वास बढ़ाया है और परिवार की समस्याओं को समझना शुरू कर दिया राजाराम वर्मा ने कहा कि अब वह बच्चों के हिसाब से चलते हैं जगदीश प्रसाद खरे, यादवेंद्र सिंह यादव, दरबारी लाल राजपूत  चंद्र विजय सिंह बुंदेला आदि ने भी इसी तरह के विचार व्यक्त करते हुए कहा कि *अल्पविराम ने उन्हें आनंद का प्रेसिडेंट बना दिया है* अपरिहार्य कारणों से डाइट नौगांव में प्रशिक्षण से वंचित रहे रामेश्वर प्रसाद सोनी, रूप सिंह लोधी, पुष्पेंद्र जैन और अजुद्धि लाल अहिरवार ने कहा कि 3 दिन का मौका तो नहीं मिला पर 3 घंटे के प्रोग्राम ने हीं उन्हें जबरदस्त आनंदित कर दिया है प्रारंभ में *बड़ा मलहरा एसडीएम श्री राजीव समाधिया ने कहा कि अल्पविराम कार्यक्रम हमारे खुद के सॉफ्टवेयर को बदल देने वाला कार्यक्रम है. यह खुद में, परिवार में, रिश्तो में और कार्यशैली में सुधार का अचूक उपाय हैं. अगर आज मैं 18 -18 घंटे काम करने के बावजूद अपना उत्साह बनाए रखता हूं तो उसके पीछे अल्पविराम ही है. खुद से बातचीत करने लगा हूं तो काम भी अब खुशी खुशी से करता हूं विपरीत परिस्थितियों में भी खुश रहता हूं मेरे मुस्लिम चौकीदार के बेटे ने रक्षाबंधन पर मेरी बेटी को राखी बांधी तो उसका आनंद हम सभी के लिए स्थाई हो गया* इस कार्यक्रम में आनंदम सहयोगी आरबी पटेल पवन बिरथरे एवं प्रदीप सेन भी उपस्थित रहे


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