सुख लौकिक है 'आंनद' अलौकिक

प्रेषक का नाम :- देवेन्‍द्र प्रसाद पाण्‍डेय, प्रेरक आनंदक, आनंमद क्‍लब, रीवा
स्‍थल :- Rewa

आनंद विभाग अन्तर्गत आनंदम क्लब रीवा द्वारा प्रात: काल स्थानीय विवेकानंद पार्क में वहां आये विभिन्न आयु वर्ग के लोगों के साथ संवाद स्थापित कर आनंद विभाग मध्यप्रदेश शासन की विभिन्न गतिविधियों के बारे में अवगत कराया गया तथापि अपने जीवन में आनंद की अनुभूति को समाहित करने हेतु कुछ क्रियाओं का अभ्यास भी कराया गया आनंद के संदर्भ में श्री देवेन्द्र प्रसाद पाण्डेय जी द्वारा सुख और आनंद को परिभाषित करने का प्रयत्न किया गया उनके द्वारा लोगों को यह बताया गया कि सुख केवल क्षण विशेष की अनूभूति है जो चलायमान है लेकिन आनंद स्थायित्व को समेटकर आत्म जागृत करने की प्रक्रिया है यह अनुभूति भी नहीं एक अलौकिक एहसास है जिसे केवल और केवल खुद को परिष्कृत कर आत्मममंथन कर समझा व जाना जा सकता है इसलिये सुख लौकिक है और आनंद अलौकिक