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दिव्यांग बुज़ुर्ग महिला की सहायता कर आनंद का अनुभव किया।

प्रेषक का नाम :- बृजेशसिंह पँवार/प्रेरक आनंदक/गो ग्रीन आंनद क्लब/
स्‍थल :- Indore
07 Feb, 2018

सुबह ऑफिस जाते समय रास्ते पर एक बुजुर्ग महिला दिखाई दी जो लंगड़ाकर चल रही थी, मेरे आगे 2 बाईक सवार जा रहे थे जिनको उस बुजुर्ग महिला ने बहुत विश्वास के साथ रुकने के लिए अपील की लेकिन दोनों ही संवेदनहीन बाईक सवार उस बेबस बुजुर्ग महिला की याचिका ठुकराकर आगे बढ़ गए। बूढ़ी महिला की उम्मीदें बेकार गई, वह हताश हो गई उसे लगा कि पूरा सफ़र उसे पैदल ही काटना पड़ेगा। उसकी हताशा का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि मुझे देखकर भी उस महिला ने रुकने का इशारा तक नही किया शायद उसे लगा होगा की मैं भी गाड़ी नही रोकूंगा लेकिन उसकी उम्मीद के विपरीत जाते हुए मैंने बाईक रोक दी। उसकी आंखों में खुशी की चमक साफ जाहिर हो रही थी। वो ऊपर देखकर कुछ बड़बड़ाई, लगा जैसे भगवान का धन्यवाद अदा कर रही हो जिसने तपती धूप में चलते हुए उसके शिथिल बदन पर तरस खाते हुए वाहन की व्यवस्था उपलब्ध करा दी। बाईक पर बैठकर बातों बातों में उसने बताया कि वह और उसके पति दोनों ही अपंग हैं। उनका कोई पुत्र नही है, एक बेटी थी जिसकी शादी हो चुकी थी। दोनों किराए के मकान में रहते हैं और मजदूरी करके अपना गुज़ारा करते हैं। अनपढ़ होने के कारण उसे दिव्यांगों के लिए सरकार की और से चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं के बारे में भी कुछ ख़ास जानकारी नही थी। मैंने उसे अंत्योदय मेले के बारे में सूचना प्रदान की तथा वहां जाकर संबंधित अधिकारियों को अपनी समस्या बताने के लिये कहा। साथ ही अपने ऑफिस का पता भी उसे दिया ताकि कहीं से भी उचित सहायता न मिलने पर वह पुनः मुझसे आकर संपर्क कर मिले। गंतव्य स्थान पर उस बुजुर्ग महिला को छोड़कर जाने लगा तो उस बूढ़ी माँ ने काँपते हाथों से सिर पर हाथ रखकर जो बेशक़ीमती दुआएँ दी उसकी तुलना दुनिया की किसी दौलत से नही की जा सकती। ज़िंदगी में धन दौलत तो सभी लोग कमाते है लेकिन अंजान अजनबी किन्तु जरूरतमंद लोगों की मदद करके जो सुकून और दुआएँ मिलती है वो हर किसी के नसीब में नही होती। दुनियावालो को यह ग़लतफ़हमी हैं कि खुश रहने के लिए दौलत की जरूरत होती है लेकिन सच्चाई यही है कि जरूरत से ज्यादा धन होना भी दुख का कारण बन जाता है। बुरे वक्त में उन लोगों की सच्चे मन से दी हुई दुआएँ ही काम आती है जिनकी कभी न कभी आपने मदद की होगी। मनुष्य को बैंक खाते में जमा धन के आगे शून्य बढ़ाने के बारे में ही नही अपितु अच्छे कर्मों के जरिये दुआओं की दौलत भी बढ़ाने के लिए प्रयासरत रहना चाहिये।


फोटो :-

   

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