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मदद् पाकर भावुक महिलायें रोने लगी और निकली आनंद की अविरल धारा

प्रेषक का नाम :- विष्णु कुमार सिंगौर मंडल संयोजक जनजातीय कार्य विभाग/आनंदम् सहयोगी मंड़ला
स्‍थल :- Mandla
04 Jan, 2018

मदद् पाकर भावुक महिलायें रोने लगी और निकली आनंद की अविरल धारा जिले में निवास करने वाली ओझा जनजाति जिनका मुख्य कार्य धार्मिक भजन का गायन और डमरु बजाकर नृत्य करके लोगों का मनोरंजन करना है इस जनजाति का एक दल की महिला लक्ष्मी बाई परते,रमेश परते, ग्राम-चिरईडोंगरी,चन्द्रवती परते,राजकुमारी,मुन्नी बाई,अम्बिका ग्राम-निरदगढ़ विगत दिन मंड़ला आयी हुई थी ग्रामीण महिलाओं और बच्चों को देखकर मेरे ( विष्णु कुमार सिंगौर मंड़ल संयोजक /आनंदम् सहयोगी ) मन में दया का भाव उत्पन हुआ। सभी को साथ में आनंदम् ( दुआओं का घर) मंड़ला में लाकर समझाया कि यहाँ से जो आपके जरूरत है उसे ले जा सकते है और बदले में कुछ नहीं लगता है। इसके पूर्व इनसे पूछा भी कि कहाँ से/ किस काम। से आये हैं। ग्रामीण महिलाओं ने बताया कि इन बच्चों के पिता। जी जेल में है उसी को देखने आये हैं। उस क्षण कुछ कपड़े जो इनकी जरूरत के थे उन्होंने रखा महिलाओं को साड़ियों की आवश्यकता थी। जब महिलाओं को साड़ियाँ निकाल कर दिया तो इन महिलाओं की आखों में आँसू निकल आये और दूधो नहाओ,पूतो फलो जैसे ढेरो़ं आशिर्वाद प्राप्त हुये हैं आनंदम् ( दुआओं का घर) मंड़ला में रहने से लोगों की मदद् करने का अवसर मिलता है। यह अद्भुत आनंद है।


फोटो :-