सामूहिक नेत्रदान का सकंल्प पत्र भरेगें 500 युवा, नेत्रदान का इतिहास बदलने की तैयारी।

प्रेषक का नाम :- विष्णु कुमार सिंगौर मंडल संयोजक जनजातीय कार्य विभाग/आनंदम् सहयोगी मंड़ला
स्‍थल :- Mandla

गौसेवा और रक्तदान संगठन मंड़ला के सदस्य और कार्यकर्ता प्रतिदिन रक्तदान करते हुये लगभग 06 से 07 लोगों की जीवन की रक्षा तो करते ही हैं। गौसेवा और रक्तदान संगठन मंड़ला के सदस्य अब अनधत्व से पीड़ित लोगों के जीवन में रोशनी भरने का प्रयास कर रहे हैं। अर्थात संगठन के सदस्य खुद के साथ 500 युवाओं से मिलकर नेत्रदान करने का सकंल्प भरेगें और मृत्यु उपरान्त नेत्र का दान कर अपने नेत्र से दुनिया देखेगें। मंड़ला जिले के 500 युवा एक साथ मृत्यु उपरान्त नेत्रदान करने का सकंल्पपत्र दिनाँक 15 दिसम्बर 2017 को जिला चिकित्सालय मंड़ला में भरा जावेगा। इस कार्य के लिये संगठन के सदस्य /पदाधिकारी जिला चिकित्सालय मंड़ला के नेत्र विभाग से मिलकर आवश्यक कार्यवाही को समझ चुका है। मंड़ला जिले में नेत्रदान करने के संबध में यह कीर्तिमान होगा। जिले में अभी तक दिनाँक 08/09/2017 को सकल दिगम्बर जैन समाज के द्वारा 110 लोगों के द्वारा नेत्रदान का सामूहिक सकंल्पपत्र ग्राम- पिंडरई, वि.ख.नैनपुर में भरा गया है। जिसे लिम्बा बुक आफँ रिकार्ड में दर्ज कराने हेतु भेजा गया है। इसी कीर्तिमान से आगे निकलते हुये गौसेवा एवं रक्तदान संगठन मंड़ला के सदस्य 500 व्यक्तियों के द्वारा नेत्रदान करने/कराने का सकंल्प लिया गया है। यह मंड़ला जिले का नेत्रदान का इतिहास होगा और नया कीर्तिमान होगा। अगले माह नेत्रदान के लिये सकंल्प पत्र भरने के लिये और युवाओं को एकत्रित करने के लिये ,समाज में युवा वर्ग को जागरूक किया जा रहा है। नेत्रदान के विषय में समाज में जो भ्रांतियाँ फैली हुई है उसे दूर करने के लिये जागरुकता लयी जा रही है। समाज के लोगों को समझाया जा रहा है कि मृत्यु उपरान्त उनके नेत्र का कार्निया का उपयोग किया जावेगा इस कार्निया की सहायता से ऐसे लोगों के जीवन में रोशनी आयेगी जो नेत्रहीन है।नेत्र नहीं होने से दर-दर की ठोकरें खाने/भीख माँगने और दूसरों पर आश्रित होने पर मजबूर हैं। नेत्रदान करने से मृत्यु के उपरान्त भी नेत्रदान करने वाला व्यक्ति दुनिया को देखेगा। नेत्रदान करने से एक ओर जहाँ नेत्रहीन व्यक्ति को खुद की लाचारी/ दूसरों पर निर्भरता से मुक्ति मिलेगी तो वहीं दूसरी ओर नेत्रदान करने वाला व्यक्ति मृत्यु के बाद भी दुनिया को देखेगा। इसी भावना के साथ 500 व्यक्तियों के द्वारा नेत्रदान कराने का लक्ष्य रखा गया है।




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