आनंदम् ( दुआओं का घर ) मंड़ला में आने बुजुर्ग/ ग्रामीण/ जरूरतमंद लोगों से बातचीत करके आत्मसुख मिल रहा है।

प्रेषक का नाम :- विष्णु कुमार सिंगौर मंडल संयोजक अदिवासी विकास/आनंदम् सहयोगी मंड़ला
स्‍थल :- Mandla
17 Nov, 2017

आनंदम् ( दुआओं का घर ) मंड़ला में आने बुजुर्ग/ ग्रामीण/ जरूरतमंद लोगों से बातचीत करके आत्मसुख मिल रहा है। आनंदम् ( दुआओं का घर ) मंड़ला में सुबह से लेकर रात्रि 08/- बजे तक सामग्री देने वाले और जरूरत का सामान लेने वाले लोगों का आना- जाना लगा रहता है। सामग्री देने वालों तो अधिकांशतः पढ़े-लिखे/समझदार लोग मिलते हैं। लेकिन जरूरत का सामान लेने वालों में अशिक्षित/बुजुर्ग/ असक्त/पीड़ित दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले लोगों के साथ-साथ समीपवर्ती जिलों ,बालाघाट,डिंडौरी,सिवनी,जबलपुर से काम करने आये हुये लोगों से भी मिलना होता है। आनंदम् ( दुआओं का घर ) में आने वाले इस तरह के लोगों की समझ/आवश्यकता/बोल-चाल की भाषा/जीवन का स्तर/ और समस्याऐं भी अलग-अलग होती हैं। आने वाले लोग भले ही अलग-अलग क्षेत्रों के हों, लेकिन जब इनसे इन्हीं की भाषा और समझ के अनुसार बात करते हैं तो आनंद आता है फिर एक नया आत्मीय रिस्ता बनता है जो आनंदम् के अतिरिक्त दूसरी जगह असंभव है। आनंदमँ ( दुआओं का घर ) मंड़ला में आनंदम् ( दुआओं का घर ) मंड़ला में आने बुजुर्ग/ ग्रामीण/ जरूरतमंद पहले जयराम जी /नमस्ते/ नमस्कार करेंगें फिर हमसे हाल-चाल पूछते हैं ,खुद हाल-चाल बतायेंगें। फिर अपने उरूरत का सामान देखेते हैं या फिर अपनी जरूरत बताते हैं। जैसे मोर नाप के शर्ट/पेंट चाहि रहे दैइदे भईया। मौर लड़की छटवीं पढ़थे ओखरलाने डरैस चाहि। कुछ इस तरह से हमारी बातचीत होती है। आज आनंदम् ( दुआओं का घर ) मंड़ला में समीपवर्ती जिला ड़िंडौरी विकासखंड़ मेहदवानी से कमलसिंह कुसराम ग्राम-धमनी,श्री सुकदेव धुर्वे ग्राम-कुसरीगंधी विकासखंड -मेहदवानी, जिला- डिंड़ौरी,श्री बैसाखू मरावी ग्राम-कुसरीगंधी विकासखंड -मेहदवानी, जिला- डिंड़ौरी,श्री हरे सिंह उद्दे ग्राम-पलकी विकासखंड़ घुघरी जिला-मंड़ला आये। आनंदम् ( दुआओं का घर ) मंड़ला में मैनें ( विष्णु कुमार सिंगौर मंड़ल संयोजक आदिवासी विकास / आनंदम् सहयोगी मंड़ला ) जय राम जी की ,फिर कहाँ से आये हैं गाँव कहाँ है, मंडला कैसे आना हुआ, मंड़ला में कहाँ रुके हुये हैं, मंड़ला किस कार्य से आये हुये हैं यह सब इन भोले लोगों ने बताया है। कि उनके क्षेत्र में काम नहीं है और मंड़ला धान कटाई करके मजदूरी कमाने आये हुये.है। आगे ओढ़ने बिछाने के कपड़े जिन्हैं क्षेत्रीय भाषा में कथरी कहतें हैं इनके पास नहीं थे। परन्तु जब दुआओं का घर से कथरी भी मिली तो इनकी खुशी अलग ही थी। गद्गद् होकर ये लोग म.प्र. शासन की पहल पर माननीय मुख्यमंत्री जी साथ ही जिला प्रसाशन मंड़ला को व्यवस्था के लिये धन्यवाद दिया । आनंदम् ( दुआओं का घर ) मंड़ला में आने बुजुर्ग/ ग्रामीण/ जरूरतमंद लोगों से बातचीत करके आत्मसुख मिल रहा है।


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