धार्मिक पुस्तकें हैं, नदी में विसर्जित करने से अच्छा है,कि धर्म-करम में रूचि रखने वाले पढ़ें।

प्रेषक का नाम :- विष्णु कुमार सिंगौर मंडल संयोजक ( आदिवासी विकास)/आनंदम सहयोगी मंडला
स्‍थल :- Mandla

धार्मिक पुस्तकें हैं, नदी में विसर्जित करने से अच्छा है,कि धर्म-करम में रूचि रखने वाले पढ़ें। डाँक्टर मालती तिलगाम शासकीय जिला चिकत्सालय मंडला में स्त्री एंव बाल रोग विशेषज्ञ हैं। आज जिला आनंदम(दुआओं का घर ) मंडला में धार्मिक ग्रंथ दूसरों के लिये छोड़े। अधिकांश साहित्य श्री राम शर्मा आचार्य जी द्वारा लिखित हैं। जैसे गायत्री महाविज्ञान ,गुरुनानक देव,संत विनोबा भावे,कर्मयोगी केशवानंद,अमरकंटक यात्रा,धनीराम बाबा,वर्तमान चुनौतियाँ और युगवर्ग,बच्चों के शासक नहीं सहयोगी बने,महायोगी अरविंद,गायत्री की सरल हवन। विधि,प्रफुल्ल चंद्रराय,मैं क्या हूँ,संतुलित जीवन। के सूत्र,गुरुमंत्र,अव्यक्त वाणी,संत विनोवा भावे,अपने ब्राम्हण औरसंत को.बचाकर रखें। डाँ. तिलगाम के द्वारा दी गयी पुस्तकें बड़े तो लिये ही बच्चों। ने भी पुस्तकों को पढ़ने में रूचि और। उत्सुकता दिखाई है।। कुमारी अंबिका फरस्ते कक्षा 9 वीं-लक्ष्मी व्रत,कु. रोशनी भारतिया कक्षा 9 वीं -गायत्री हवन विधि,कु. मोनिका भारतीया कक्षा 8 वीं-दिव्य शक्तियों का उदभव, रमेश भारतीया कक्षा 8 वीं- क्यों और रमेश झारिया ने गुरुनानक देव की वाणी नामक पुस्तकें प्राप्त की हैं। डा.श्रीमती तिलगाम ने कहा है कि प्रारंभ में पुस्तकों को नदी में विसर्जित करने का। सोचा था लेकिन फिर आपका ध्यान आया। धार्मिक पुस्तकें हैं, नदी में विसर्जित करने से अच्छा है,कि धर्म-करम में रूचि रखने वाले पढ़ें।


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