• रिक्‍त पदों पर भर्ती की शर्तों तथा आवेदन की अंतिम तिथि में परिवर्तन       • राज्‍य आनंद संस्‍थान में रिक्‍त पदों की संविदा/ प्रतिनियुक्ति पर पूर्ति

इनके आनंद और नम्र आँखों को देखकर ही इस तरह के कार्यों के लिये उर्जा मिलती है।

प्रेषक का नाम :- विष्णु कुमार सिंगौर मंडल संयोजक/आनंदम सहयोगी मंडला
स्‍थल :- Mandla
14 Sep, 2017

बहुत दिनों से विधवा/परित्यकता महिलाओं की माँग थी कि इनके पास साड़ियों की आवशयक्ता है। जब इन महिलाओं को क्लब की डायरेक्ट टू होम सेवा के अन्तर्गत नयी साड़ियाँ दी गयी तो इनकी आस्था हमारे प्रति बढ़ गयी। श्रीमती राजकुमारी धूमकेती ,श्रीमती सेवकली मरावी जिनके पति बहुत ही कम उम्र में.ही चल.बसे और इसके उपर तीन छोटे-छोटे बच्चों की जिम्मेदारी है।पास के ही गाँव खापाकला से मुख्यालय मजदूरी करने के लिये आती है। श्रीमती राधा बाई यादव पति.श्री सुकदेव यादव ग्राम ताला जो जिला मुख्यालय से 55 किमी. की रहने वाली है और मजदूरी करने के लिये जिला मुख्यालय आकर रहने लगी है। गाँव में मजदूरी का काम नहीं है। श्रीमती पारो बाई मरावी पति श्री लोचन सिंह मरावी भगतसिंह वार्ड मंडला अत्यंत ही गरीब है और आँखो में रोशनी नहीं होने से कार्य करने.में असमर्थ है। रहने को मकान तक नहीं है, शासकीय भूमि पर ही टूटी हुई झोपड़ी में वृद्ध पति के साथ निवास करती है। पारोबाई को जब साड़ी उसकी झोपड़ी में ही जाकर दिया तो उसके मन में आनंद और आँखो में आँसू थे। महिला ने कहा कि आज के युग में दूसरों के लिये इस तरह के भाव कहाँ मिलते हैं। उसके शब्द थे। आज के जुग मा कौन आय या सब करथे ,ने बेटा तोला काहिन आये मिलथे जो हमार लाने करत है। यह तो उस महिला की हमारे प्रति आस्था.थी। लेकिन इस तरह के शब्दों से मुझे उर्जा मिलती है


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