आनन्द अंतः करण की यात्रा का नाम है, आनन्द के लिए अंत:यात्रा करें- डॉ सुधीर 

प्रेषक का नाम :- आचार्य आनंन्द क्लब अम्बाह डॉ सुधीर आचार्य आनंदम सहयोगी बालकृष्ण, मनोज ,विश्वनाथ सिंह
स्‍थल :- Morena
22 Apr, 2019

अपने मन की सुख सुविधा जुटाने की कोशिश में हमारे हाथ दुख ज्यादा आए और आनन्द क्षणिक प्रत्येक व्यक्ति स्वयं तो सुखी होना चाहता है आनंद से भर जाना चाहता है लेकिन दूसरों को दुख पीड़ा क्लेश द्वेष नफरत देकर वह स्वयं कैसे आनंदित हो सकता है ?

उक्त उद्गार अल्पविराम आनन्द के मास्टर ट्रेनर डॉक्टर सुधीर आचार्य ने अम्बाह संस्कृति हॉल में अल्पविराम कार्यक्रम के दौरान व्यक्त किये। डॉ सुधीर ने आगे कहा कि यही कारण है कि मानव की समस्त चेष्टाएं निष्फल हो जाती हैं । वह जब तक दुख पीड़ा संत्रास बांटता रहेगा उसके हिस्से में भी दुख चिंता परेशानी उलझन आती रहेंगी ।वह इनसे मुक्त हो ही नहीं सकता । आनन्द के लिए पहले इन सब विकारों से मुक्त होना होगा और इस मुक्ति के लिए अंतःकरण की यात्रा करनी होगी । इसलिए आनन्द अंतः करण की यात्रा का नाम है। मानव जीवन की वृत्तियों प्रवृत्तियों और चित्त पर पड़ते प्रभाव को डॉ आचार्य ने फ्रीडम क्लास और चिंता का दायरा के माध्यम से उदाहरण सहित समझाया । इस अवसर पर आध्यात्म विभाग के अल्पविराम प्रशिक्षक पंडित बालकृष्ण शर्मा विश्वनाथ सिंह और मनोज शर्मा ने सप्रासंगिक कहानियां प्रस्तुत की , जो जीवन की सम्यक दृष्टि कोण को दर्शाती है।


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