सबकी खुशी में अपनी खुशी तलाशते शोभाराम।

प्रेषक का नाम :- विष्णु कुमार सिंगौर मंडल संयोजक जनजाति कार्य विभाग/आनंदम सहयोगी मंडला
स्‍थल :- Mandla
28 Dec, 2018

यदि दिल में इरादे नेक हों तों परिस्थितियाँ अपने आप अनुकूल हो जाती हैं। .यह चरितार्थ हुआ दिन शुक्रवार को। मण्‍डला के 55 साल के .शोभाराम उइके दोनों पैरों पर खड़े. होने में असमर्थ. है। ट्राइसाइकिल से शहर भर में घुमते हैं। शहर के लोग जो कुछ मदद कर देते हैं,  राहगीरों से जो मिले उसी से गुजारा करता है।

वैसे तो शोभाराम को आवश्यक कपड़े, वस्‍तुए आनंदम केन्‍द्र (दुआओं का घर) मंड़ला से मिलते ही रहते हैं, लेकिन शुक्रवार को शोभाराम ने शुक्रवारी बाजार के किसी कपडे़ विक्रेता से ठंड से बचने के लिए एक स्वेटर की माँग की। बदले में कपडे़ विक्रेता ने स्वेटर से भरे हुए दो गठ्ठे शोभाराम को यह कहते हुये दिया कि जो चहिए इनमें से लेना। दिव्याँग शोभाराम भी कहाँ पीछे रहने वाले थे। स्वेटर के दोनों गठ्ठे जिनमें लगभग एक सैकडा स्वेटर रही होगीं, अपने ट्राइसाइकिल में रखवाकर उन्हें आनंदम ( दुआओं का घर) ले आये। शोभाराम ने उनमें से एक स्वेटर खुद के लिए रखते हुये बड़े प्रसन्न भाव से कहा ’’बाकी दूसरे जरुरत मंद के काम आयेगीं”।


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