दुःख को सुख में बदलती जनसहयोग की अनूठी कहानी

प्रेषक का नाम :- विजय मेवाड़ा आनंदम सहयोगी/राधेश्याम साबू जी परपीड़ाहर संस्था
स्‍थल :- Indore
17 Dec, 2018

दुःख को सुख में बदलने की सच्ची कहानी, पढिये आपको भी खुशी होगी! 

30 साल का विजय, उसका लगभग 3 साल पहले अचानक कमर के नीचे का हिस्सा निष्क्रिय हो गया । उसे डाक्‍टरों को दिखया गया। वह लगभग 6 माह इंदौर के एम वाय अस्‍पताल में भर्ती रहा । इस दौरान अस्‍पताल में पत्नी के अलावा उसे देख भाल करने वाला कोई नहीं था। ना घर से न ससुराल से कोई मिलने ही आया।

आनंदम स्थल परपीड़ाहर संस्था ने उसे हर तरह की सहायता की।  परंतु अंत में डॉक्टरों ने विजय की अस्‍पताल से छुट्टी करते हुए बोल दिया कि अब यह बैठ भी नहीं सकता। विजय की 25 वर्षीय सीधी साधी पत्नी को इस दौरान घर चलाने हेतु संस्‍था ने सहायता की । धीरे-धीरे उसकी गृहस्‍ती  चल रही थी। संस्था के लोग लगातार विजय की  प्राकृतिक इलाज , वेद्य की दवा आदि से सहायता करते रहे। धीरे -धीरे करते -करते अब विजय वाकर की सहायता से थोडा बहुत चलने लगा और  व्हील चेयर का उपयोग भी करने लगा।

ऐसी संघर्षशील व्यक्ति भिक्षावृत्ति न करे एवम उसे स्वावलंबी बनकर आत्मसम्मान से जीवन निर्वाह करे इस हेतु परपीड़ाहर संस्था ने हाल ही इसे एक गैस चूल्हा देकर उसकी बस्ती में एक चाय की दुकान खुलवाई थी । बस्ती के लोग भी विजय का सहयोग करने के उद्देश्य से उसकी दुकान से चाय पीने लगे। इस तरह के सहयोग भाव से उसकी दुकान बस्ती में चलने लगी। उसका और अधिक सहयोग करते हुए उस दिव्यांग भी को जनसहयोग से  लगभग ₹20000 का परचून की दुकान का दैनिक उपयोगी सामग्री दिलवाकर इसे स्वालंबन की दिशा में एक कदम और बढवाया ।अ ब उसकी चाय की दुकान के साथ छोटी सी परचून की दुकान भी है। विजय के संघर्ष की दास्तान में आनंद विभाग एवम पीड़ा हर संस्थान की महत्वपूर्ण भूमिका रही जो हम सब साथियों के लिए गर्व भरा आनंद है। *गरीब असहाय लाचार मरीजों के हित हम ऐसे काम ज्यादा से ज्यादा करें । जो भी यह खबर पढ़े उन सभी से अपेक्षा है कि आप भी इस प्रकार के सहयोगात्मक कार्यों के आधार स्तंभ बने।


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