दूसरों की मदद् करने के लिए सुन्दर ’शरीर नहीं , सुन्दर ह्रदय’ आवश्यक है।

प्रेषक का नाम :- विष्णु कुमार सिंगौर. आनंदम् सहयोगी मंड़ला
स्‍थल :- Mandla
20 Nov, 2018

दूसरों की मदद् करने के लिए सुन्दर “’’शरीर””नहीं “”सुन्दर ह्रदय’’” आवश्यक है। संलग्न फोटो में एक बुजुर्ग है । नाम है पुरोत्तम झारिया एवं बीच में दिव्यागँ नीरज रावत ( जो दोनो पैरों से लाचार होने से ट्रायसाइकिल से चलता है) । दोनों समीपी ग्राम खैरी  के निवासी हैं। लगभग दो-तीन दिनों में आनंदम् ( दुआओं का घर ) मंड़ला में  मिलने-जुलने, दुआ-सलाम वास्ते आते रहते हैं । आवश्यक नहीं कि दोनों साथ आयें क्योंकि दोनों का पेट भीख मांगने से ही भरता है, इसलिए जिसे जब समय मिलता है आ जाते हैं।

बुजुर्ग सुबह से शाम तक मंदिर में बैठ कर माँगता है तो दूसरा ट्रायसाइकिल से चलते हुए सड़क पर । पर संयोग देखिये कि पुरोत्तम झारिया एक ऊनी बनियान की तलाश में आनंदम् ( दुआओं का घर) आये तो नीरज टोप की । परन्तु पुरूषोत्तम के नाप एवं पसंद का ऊनी बनियान नहीं होने से दिव्याँग नीरज रावत स्वयं की अतिरिक्त स्वेटर घर से लाकर बुजुर्ग पुरुषोत्तम को दे दिया । दोनों आनंद में थे। एक स्वेटर पाकर,तो एक मदद/सहयोग कर । दिव्यागँ नीरज ने उसी आनंदित भाव से कहा कि हमारे लियेे तो यह एक समागम केन्द्र भी है । भले ही कुछ लेना-देना न हो ,लोगों के मिलने का ठिकाना है,


फोटो :-