दीवाली पर घर लौट रहे लोग जरूरत का सामान पाकर “आनंदित’हुये

प्रेषक का नाम :- विष्णु कुमार सिंगौर मंडल संयोजक जनजाति कार्य विभाग/आनंदम् सहयोगी मंड़ला
स्‍थल :- Mandla
06 Nov, 2018

मंडला शहर में न केवल अपने जिला, वरन सीमावर्ती जिलों - डिंडौरी, बालाघाट, जबलपुर, सिवनी के वाशिंदे भी काम करने (खेतीहर मजदूरी /रिक्शा/हाथठेला चालक) आते रहते हैं। बाहर से आये लोगों ने स्वयं की जरूरत तो आनंदम् ( दुआओं का घर ) मंडला से पूरी कर रहे हैं। दीपावली का त्यौहार मनाने इन्हें अपने घर भी लौटना है, और आनंदम् ( दुआओं का घर ) मंडला में रखी सामग्रियों को देखकर अनायास ही इनके मुख से निकलता है कि “”मोर नाती ला होई जाही”’…””मोर नतनिन खा और चाही रहे””….मोर लरका ला होही…..लेकिन थोडी सी समस्या सही साइज के चुनाव की होती है।

इस तरह के वाक्य इनके आनंदित चेहरे से निकलते हुये सुनकर और इनके खुशी के भाव देखकर लोगों की मदद् करने की हमारी खुशी और भी बढ़ जाती है।  जिस अपनत्व के साथ ये लोग बताते है कि”’ दीवाली मनाने ये अपने घर लौट रहे हैं इसलिए घर के सदस्यों के लिये कपड़े यहां से ले जा रहें है”” लगता ही नहीं हमसे ये अपरिचित हों।

आनंदम् ( दुआओं का घर ) मंड़ला में लोगों की सेवा, मदद्, सहयोग, मार्गदर्शन करने तथा अनेक लोगों से मिलने का जो अवसर मिलता है वह अन्यत्र नहीं है। जिस भाव से लोग धन्यवाद/ आशिर्वाद/ दुआऐं देकर जाते हैं, वह वाकई आनंदित और आकर्षित करने वाला है, और हमें आगे भी ऐसा करने के लिये उर्जा के साथ-साथ प्रेरित करने वाला है।


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