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ना कुछ दिया और न ही लिया । अशिक्षित को कर्ज से बचाया, वो भी आनंदित हुआ। और हमारे में भी आनंद का तूफान उठा।

प्रेषक का नाम :- विष्णु कुमार सिंगौर मंडल संयोजक/आनंदम सहयोगी मंडला
स्‍थल :- Mandla
26 Aug, 2017

ना कुछ दिया और न ही लिया । अशिक्षित को कर्ज से बचाया, वो भी आनंदित हुआ। और हमारे में भी आनंद का तूफान उठा। एक कहावत सुनी थी।कि ज्ञान का कोई मोल नहीं होता, इसकी केवल दिशा सही हो।आनंदम (दुआओं का घर ) मंडला कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित होने से अनेक,अनजान और अशिक्षित लोग विभिन्न प्रकार की समस्याओं का मार्गदर्शन के लिये आते ही हैं। परन्तु आज जो हुआ वह विशिष्ट ही था। लक्ष्मी दास पनरिया जाति पनिका ,( पिछड़ा वर्ग ) बेहद निराश आनंदम (दुआओं का घर) में आकर मुझ कहा कि ‘’सर एजूकेशन लेना है, कहाँ से ,कैसे मिलेगा? सबसे पहले..मैने उसे पानी पिलाया और बैठने को कहा,फिर लोन लेने का कारण पूछा। उसने बताया कि ग्राम-सुरेहली विकासखंड- घुघरी,जिला मुख्यालयय से 65 किमी.दूर से आया है। और बेटा रत्नेश पनरिया शा-शिब इंस्टिट्यूट एंड टेक्नालाँजी भोपाल में बी.ई.प्रथम वर्ष का छात्र है।खुद की आर्थिक हालात ठीक नहीं हैऔर वार्षिक आय महज 50,000/है। एजूकेन लोन के लिये उपसंचालक पिछड़ा वर्ग मंडला से भी निरशा हुई है। कारण समझ में आ गया था। कि लक्ष्मीदास पनरिया के द्वारा समस्या को.ठीक से प्रस्तुत करने के कारण उसे निरश होना पड़ा है। उसे बताया कि उच्च शिक्षा के लिये फीस शासन के द्वारा दी जाती है, साथ ही विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति भी दी जाती है। इसके लिये शासकीय पो.मै.छा.पोर्टल में आनँलाइन आवेदन करना होगा और उसकी प्रति सबंधित जिला कार्यालय में जमा करना होगा। लक्ष्मी दास के.शब्दों.में “”मैं करज सों बच गयों साहब, या करजा मोर पिरान ला ले लेतिस”” और चेहरे पर संतुष्टि के भाव स्पष्ट दिखाई दे रहे थे। वहीं। मेरे अंदर भी अलग तरह का आनंद/ उत्साह उठ रहा था कि व्यक्ति को मार्ग दिखाकर ज्ञान का वास्तविक उपयोग किया है।


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