भोजन करते समय अपरिचित से चर्चा करनेे पर आनंद की अनुभूति

प्रेषक का नाम :- विनोद धाकड (चंबल आनंद क्‍लब)
स्‍थल :- Bhopal
01 Jun, 2018

मै रोज भोजनालय पर शाम को भोजन ग्रहण करने जाता था, पर किसी से कोई चर्चा नही करता, वहॉ जाता भोजन की थाली लाने के लिए कहता, भोजन ग्रहण करके अपने आसियाने की तरफ रूख कर चल देता था। ऐसी दिनचर्या से मुझे अकेलापन महसूस होता था, मे उदासी सी चेहरे पर रहती थी पर मुस्‍काहट कभी कभी झलकती थी। मे आनंदम् विभाग से जुडा मुझे आनंद की तरफ रूचि पैदा होने लगी में जुडता चला गया, इससे मेने जाना अलग-अलग व्‍यक्तियो से चर्चा और उनसे सीधे वार्तालाप कर संस्‍कृति, समस्‍याए, सुझाव आदि विषयों पर संवाद करता रहता था। कुछ दिन बाद मेने महसूस किया कि, मैं पहले के मुकाबले ज्‍याता मोटिवेट,चर्चा करने में रूचि और तो और एक से दो रोटी भोजन में बढ गई अब में प्रतिदिन शाम को बहुत उत्‍सुक रहता हॅू कि भोजनालय जाऊंंगा और किसी न किसी नए व्‍यक्ति से संवाद कर आनंद महसूस करवाऊगा और स्‍वयं आनंदित रहूगां ।दो तीन माह से यही मेरी दिनचर्या चल रही है * में चाहूगॉ जो व्‍यक्ति सार्वजनिक जगह पर भोजन करते है वे किसी न किसी अपरिचित व्‍यक्ति से किसी विषय पर चर्चा करें फिर स्‍वंंय महसूस करे क्‍या मुझे खुशी मिली/ भोजन मेने ज्‍यादा ग्रहण किया/ मन प्रसन्‍न हुआ।