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गरीब बेसहारा लोगों की सेवा से मिलती है आत्मशांति

प्रेषक का नाम :- महेश छाड़िया/आनंदक/गो ग्रीन आनंद क्लब/बृजेशसिंह पँवार/प्रेरक आनंदक
स्‍थल :- Indore
11 May, 2018

भारत सरकार की डिजिटल इंडिया केम्पेन के अंतर्गत कार्य करने वाली कॉमन सर्विस सेंटर योजना ने मेरे जीवन मे आम जन मानस की सेवा करने का भाव जागृत किया। मैं ई गवर्नेन्स भारत सरकार के उप महाप्रबन्धक श्री राजाराम पाटीदार सर एवं कॉमन सर्विस सेंटर के जिला प्रबंधक फैज़ल खान सर के माध्यम से csc से जुड़ा। मैं और मेरा भाई हम दोनों मिलकर कॉमन सर्विस सेंटर (csc) के जरिये ग्रामीण क्षेत्र में डिजिटल सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। मुझे कॉमन सर्विस सेंटर से जुड़े ज्यादा दिन नही हुए है लेकिन CSC के अधिकारियों व अन्य कॉमन सर्विस सेंटर संचालकों की सहभागिता से मुझे बहुत कुछ सीखने को मिला है। कॉमन सर्विस सेंटर संचालक एवं प्रेरक आनंदक श्री बृजेशसिंह पँवार एव मध्य प्रदेश जनअभियान के ब्लॉक समन्वयक श्री सुरेश चंद्र यादव सर एव समस्त cmcldp के छात्रों के संपर्क में आने पर और उनकी निस्वार्थ समाज सेवा से प्रेरित होकर मैं भी आनंदक बना। एक दिन तेज धूप में पैदल चल रही एक बुज़ुर्ग महिला और एक बीमार व्यक्ति को लिफ़्ट देकर उनकी मंज़िल तक पहुंचाया। किसी की मदद करके उस दिन मन बहुत प्रसन्न हुआ। मेरी इस कहानी को राज्य आनंद संस्थान की वेबसाइट पर भी प्रकाशित किया गया। मेरी शादी की छठी सालगिरह के दौरान मैं और मेरी पत्नी इंदौर अन्नपूर्णा माता जी के दर्शन करने गए। दर्शन करने के पश्चात मन में ख्याल आया कि हम हमारी शादी की सालगिरह उन मजदूरों के साथ सेलिब्रेट करें जो दो वक्त की रोटी के लिए गर्मी में अपने छोटे-छोटे बच्चों के साथ भूखे-प्यासे काम करते है। मैं और मेरी पत्नि दोनों ने दर्शन करने के पश्चात बाजार से 3 दर्जन केले और कुछ बिस्कुट के पैकेट खरीदे। हम दोनों उन लोगों को ढूंढते हुए राऊ रोड़ राजेंद्र नगर पहुंचे जहां पर कुछ महिलाएं एक से डेढ़ साल के छोटे बच्चों के साथ सड़क के किनारे नालियां खोदने का काम कर रही थी मैं और मेरी पत्नि हम दोनों उनके पास गए और उनसे कहा कि हम आपके लिए केले और बिस्किट लाए हैं, आप हमारे साथ मिलकर इन्हें खाएंगे तो हमें खुशी होगी। उन लोगों ने हमारी बात स्वीकार कर ली। हमने सभी महिलाओं और बच्चों को केले और बिस्किट बाँट दिए। बच्चों ने शायद पहली बार केले और बिस्किट का स्वाद चखा होगा, उनके चेहरे की मुस्कान साफ साफ जाहिर कर रही थी कि उन्हें केले और बिस्किट बहुत पसंद आये हैं। उन्हें खाते हुए देख मन में अपार प्रसन्नता हो रही थी। शादी की छठी सालगिरह मनाते हुए आज जितनी प्रसन्नता हो रही थी उतनी शायद कभी नही हुई । मुझे यह एहसास हुआ कि हम चाहे हम उन्हें रोजाना खाने के लिए ना दे पाए लेकिन हमारे द्वारा उठाया गया एक कदम उनके जीवन के लिए यादगार बन जाता है। हम यूँ ही छोटे-मोटे कार्यक्रमों में लाखों रुपए खर्च कर देते हैं लेकिन वह लाख रूपये खर्च करके भी उतना आंनद नही आता जितना मात्र 200-300 रुपये खर्च करके किसी भूखे को भोजन करा के आ जाता हैं। प्रत्येक सक्षम व्यक्ति को यही प्रयास करना चाहिए कि वह समाज में निम्न वर्ग के लोगों के काम आ सके। बेसहारा लोगों का सहारा बन सकें। किसी की निस्वार्थ सेवा करके देखिए आपका जीवन धन्य हो जाएगा। महेश छाड़िया /आनंदक / गो ग्रीन क्लब /बृजेश सिंह पंवार प्रेरक आनंदक


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