बुज़ुर्ग की सेवा कर आनंद प्राप्त किया।

प्रेषक का नाम :- बृजेशसिंह पँवार/प्रेरक आनंदक/गो ग्रीन आंनद क्लब/
स्‍थल :- Indore
09 May, 2018

दोपहर के तकरीबन 2 बज रहे थे, तेज धूप बरस रही थी। मैं ऑफिस में बैठकर कुछ जरूरी काम कर रहा था लेकिन किसी काम में मन नही लग रहा था। तबियत कुछ ज्यादा खराब होने लगी तो डॉक्टर से मिला, उन्होंने दवाई लेने के साथ आराम करने की भी सलाह दी। दवाख़ाने से घर की ओर जा रहा था कि गाँव के हनुमान मंदिर के पुजारी जी चिलचिलाती धूप में पैदल ही घर की ओर जाते हुए दिखाई दिए। मैंने गाड़ी उनके पास जाकर रोकी और पूछा - "पंडितजी ! इतनी धूप में कहाँ जा रहे हो।" उन्होंने पसीना पोछते हुए थके हुए शब्दों में कहा - "बैंक गए थे, अब घर जा रहे हैं।" मैंने कहा - "बैठिए! घर तक छोड़ देता हूँ।" उनकी बुझी हुई आंखों में चमक लौट आयी, वो गाड़ी पर बैठे और हम बातें करते हुए घर की ओर चल पड़े। पंडितजी का घर सड़क के किनारे पर ही था। पंडितजी को घर पर छोड़ा तो उन्होंने बहुत खुश होकर यशस्वी भव और सदा खुश रहने का आशीर्वाद दिया। उनका आशीष पाकर चिलचिलाती धूप में झुलसे हुए मन को शीतलता का एहसास हुआ। मन प्रसन्न हुआ तो स्वास्थ्य में भी सुधार होने लगा। स्वस्थ्य जीवन के लिए दवा ही नही दुआं की भी जरूरत होती है। दवा तो खरीदी जा सकती है लेकिन दुआएं केवल निःस्वार्थ सेवा से ही प्राप्त की जा सकती हैं। दवा तो एक्सपायर भी हो जाती है लेकिन दुआएँ कभी एक्सपायर नही होती। मेरा आपसे विनम्र अनुरोध है जब भी किसी जरूरतमंद की मदद करने का सौभग्यशाली अवसर मिले तो मदद जरूर करें। आपको अपार आनंद की अनुभूति होगी। बृजेशसिंह पँवार प्रेरक आनंदक गो ग्रीन आनंद क्लब राज्य आनंद संस्थान मप्र


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