बुजुर्गो की सेवा में ही है सच्चा सुख

प्रेषक का नाम :- गो ग्रीन क्लब/महेश छाड़िया/आनंदक/ बृजेशसिंह पंवार प्रेरक आनंदक
स्‍थल :- Indore
28 Apr, 2018

आज उज्जैन हॉस्पिटल से लौटते समय ऐसा मंजर देखा की रूह कांप गई| इस तिलमिलाती गर्मी में जब तापमान 40 डिग्री के आस पास हो ऐसे समय मे लोग घर से बाहर निकलना पसन्द नही करते है ऐसे समय मे अपना पेट भरने के लिए एक बुजुर्ग महिला जिसकी उम्र लगभग 65-70 के बीच होगी इस भीषण गर्मी में वह महिला पैदल अपने सर पर आंटे की पोटली ओर हाथो में कुछ खाने का समान लिए हुये सुनसान रोड़ पर जा रही थी इसी बीच मेरे आगे जा रही दो बाइक सवार को उस बुजुर्ग महिला ने रोकने के लिए हाथ दिया लेकिन किसी ने गाड़ी नही रोकी जब मेरा निकलना हुवा तो शायद उस महिला ने मुझे हाथ देना भी मुनासिब नही समझा क्योंकि वह बहुत थक चुकी थी एवं जिसे भी रोकने के लिए हाथ देती कोई नही रोकता था (उस महिला के बताए अनुसार) आखिर मेने उसके पास गाड़ी रोकी ओर उससे पूछा अम्मा कहाँ जाना है? बोलते वक्त उनके मुंह से सांसे बहुत तेज चल रही थी क्योंकि वह एक किलोमीटर का सफर सर पर आंटे की पोटली लिए तय कर चुकी थी उसे 4 किलोमीटर और जाना था| उम्मीद भरी निगाहों से कहा बेटा मुझे आगे वाले गाँव तक छोड़ देना| मेने उनको गाड़ी पर बिठाया । उस बुजुर्ग महिला को गाड़ी पर बैठाने के बाद उसके मुख से जो दुआएँ निकली शायद उसकी तुलना हम कभी नही कर सकते| मन मे एक ऐसी खुशी मिल रही थी मानो भगवान मिल गए हो । थोड़ा आगे चलने पर एक सज्जन व्यक्ति ने डबल सवारी ओर आंटे की पोटली होने के बाद भी मुझे रोकने के लिए हाथ दिया मेने मन मे सोचा यह व्यक्ति भी मुसीबत में है| मेने उनके पास गाड़ी रोकी ओर आंटे की पोटली बाइक की पेट्रोल की टंकी पर रखी और उसे भी बैठाया रास्ते मे चलते वक्त उस सज्जन व्यक्ति से पूछा तो उससे कहा कि “मुझे सांस की प्रॉब्लम है और कोई गाड़ी वाला रोक नही रह था, मुझसे बिलकुल भी नहीं चला जा रहा था|” अंततः दोनों को अपने अपने स्थान पर मेरे द्वारा छोड़ा गया।कोई भी कार्य करने में आनंद की अनुभूति तभी होती है जब वह कार्य निस्वार्थ भाव से किया गया हो । जरूरी यह नही की हम क्या कर रहे है जरूरी यह है कि हमारे ऐसे करने से सामने वाला कितना खुश है। में सभी से यही अपेक्षा करता हु की जिससे जो भी सम्भव हो सके करे क्योंकि लोग कहते है "डूबते को तिनके का सहारा काफी होता है" । महेश छाड़िया आगरा(देपालपुर), आनन्दक, गो ग्रीन क्लब


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