“सहयोग” एक आत्मीय सुख की अनुभूति

प्रेषक का नाम :- प्रयास क्लब
स्‍थल :- Indore
25 Apr, 2018

“सहयोग” एक आत्मीय सुख की अनुभूति अप्रेल की चिलचिलाती धुप जो मनुष्य को पसीना छुड़ाने में सक्षम है। स्थिति यह हो गई है कि पारा अब 40 डिग्री के पार तक जा पहुंचा है। वहीं इस चिलचिलाती धूप में कोई घर से बाहर भी नहीं निकलना चाह रहा है। जिसके कारण बाजार की सड़कों पर दिन में ही सन्नाटा पसरा नजर आ रहा है। इसके अलावा रात में भी गर्मी के कारण लोगों को नींद नहीं आ रही है। जिससे लोग काफी परेशान हैं। लोग भिन्न-भिन्न साधनों का उपयोग कर गर्मी से बचने के उपाय अपनाते नजर आते है, वहीँ दूसरी तरफ सुबह 8 बजे से रात्रि 8 बजे तक क्षेत्र की लगभग 50 दुकानों पर दौड़ लगाकर चाय देने वाले भगवानसिंह राणा उम्र ३६ वर्ष, तपती धुप में भी अपने पेट के लिए फटे कपड़ो के साथ कार्यरत है। सबकी एक आवाज पर चाय पहुचाने वाले कर्मठ भगवानसिंह राणा कई बार मेरे ऑफिस पर भी चाय देने आते है। हमेशा की तरह आज भी दोपहर में चाय लेकर मेरे पास आये तो मेरा ध्यान उनके वस्त्रों पर गया तो में भावुक हो उठा। फटे कपडे आर्थिक स्थिति खुद बयां कर रहे थी की दिन भर मजदूरी से पेट भरने वाला कैसे कपडे खरीदता होगा? उस दिन में सोचते रहा उनके वस्त्रों की दशा को मैं केसे सुधार सकता हूँ. फिर सोचते सोचते ख्याल आया की क्यों न मैं अपने कुछ वस्त्र इन्हें दे दूँ। मेरे द्वारा निवेदन करने पर वें मना नहीं कर सके और बल्कि उनके चेहरे पर एक ख़ुशी की लहर दिखी जो मनमोहक थी। आज मेने उन्हें अपने प्रतिष्ठान पर बुलाकर उन्हें जरुरी वस्त्र भेंट कर दिए, जिसका चित्र भी मेने साझा किया है। दोस्तों दान की महिमा तभी होती है जब वह निस्वार्थ भाव से किया जाता है अगर कुछ पाने की लालसा में दान किया जाए तो वह व्यापार बन जाता है। यहाँ समझने वाली बात यह है कि देना उतना जरूरी नहीं होता जितना कि 'देने का भाव'। यह एक ऐसा अनुभव था जिससे मेरी प्रेरणा दायक गतिविधियाँ ओर भी मजबूत हुई एवं सभी से अपेक्षा करता हूँ की भेंट स्वरुप ही सही किन्तु आनंद का अनुभव तो हुआ। धन्यवाद महेश वर्मा (प्रेरक आनंदक) प्रयास क्लब-इंदौर राज्य आनंद संस्थान, मध्यप्रदेश शासन


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