छतरपुर। रोगियों के प्रति अधिक संवेदनशील होने, चिकित्सक लेंगे नियमित अल्पविराम

प्रेषक का नाम :- लखन लाल असाटी आनंदम सहयोगी छतरपुर
स्‍थल :- Chhatarpur
15 Jun, 2017

रोगियों के प्रति अधिक संवेदनशील होने, लेंगे नियमित अल्पविराम अटेंडरों की आक्रामकता से बदला चिकित्सकों का स्वभाव छतरपुर। जिला चिकित्सालय में पदस्थ चिकित्सकों ने मंगलवार को आनंदम सहयोगी लखन लाल असाटी के आग्रह पर 15 मिनिट मौन रहकर अपनी अंतरआत्मा की आवाज सुनने का अभ्यास किया और यह जानने की कोशिश की कि रोगियों के संदर्भ में अस्पताल में सबसे बड़ी दो समस्यायें कौन सी हैं। चिकित्सकों ने कहा रोगियों के परिजनों की आक्रामकता से उनके व्यवहार में भी परिवर्तन हुआ है पर अब वह नियमित अल्पविराम लेकर रोगियों के प्रति और अधिक संवेदना पूर्ण व्यवहार करेंगे। चिकित्सकों ने कहा कि वे सुबह-सुबह 15 मिनिट नियमित रूप से अल्पविराम को देंगे। सिविल सर्जन डॉ. आरपी पांडे ने आनंद विभाग की ओर से अल्प विराम का आयोजन नर्स प्रशिक्षण केंद्र में कराया था। अल्पविराम में डॉ. व्हीपी शेषा, डॉ. महेश पहारिया, डॉ. आरके शर्मा, डॉ. राजेश जैन, डॉ. एलसी चौरसिया, डॉ. सुषमा खरे, डॉ. लता चौरसिया, डॉ. आरके धमनियां, डॉ. गायत्री नामदेव, डॉ. महेन्द्र गुप्ता, डॉ. शिवम दीक्षित, डॉ. अमित निशीष अग्रवाल, डॉ. संजना रॉबिन्सन, डॉ. आरपी गुप्ता, डॉ. जीएल अहिरवार, डॉ. बीएम चौरसिया, राजकुमार गोस्वामी, रंजीत दीक्षित आदि उपस्थित थे। प्रारंभ में यह मत कहो खुदा से मेरी मुश्किलें बड़ी हैं गीत के साथ अल्पविराम की शुरुआत हुई। रोगियों का जिला चिकित्सालय और उसके चिकित्सकों पर भरोसा नही आनंदम सहयोगी लखन लाल असाटी ने चिकित्सकों से कहा कि वे सब अपने गले के स्टेथोस्कोप आला कुछ देर के लिए उतार कर दूर रख दें और शांत रहकर खुद को जानने की कोशिश करें। सभी चिकित्सकों ने 30 सेकेण्ड तक ताली बजाकर पाया कि उनका पूर्वानुमान वास्तविकता से बहुत कम था। आनंद क्या है इस पर चिकित्सकों ने अपने-अपने विचार व्यक्त किए। अल्पविराम में जिला चिकित्सालय की प्रमुख दो समस्याओं हेतु मौन रहकर चिंतन करने के बाद डॉ. महेन्द्र गुप्ता ने कहा कि पूरे अस्पताल में मरीजों के मार्गदर्शन की कोई व्यवस्था नहीं है तथा जांच सुविधाओं का अभाव है। डॉ. आरके शर्मा ने कहा कि रोगियों का जिला चिकित्सालय और उसके चिकित्सकों पर भरोसा नहीं है। रोगियों की अपेक्षाएं बहुत अधिक हैं। डॉ. सुषमा खरे, डॉ लता चौरसिया तथा डॉ. एलसी चौरसिया ने कहा कि प्राय: रोगियों के परिजनों का व्यवहार अत्यंत आक्रामक होता है। डॉ. अमित अग्रवाल ने कहा कि अस्पताल में चिकित्सकों और सहयोगी स्टाफ की कमी से सभी रोगियों को संतुष्ट कर पाना कठिन है।


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