आनंदक सम्मेलन इंदौर -अधिकारियों और आनंदकों ने जाना,"अंतरात्मा का दर्पण है अल्पविराम" साथ ही गुब्बारे फुलाये और ठहाके भी लगाए।

प्रेषक का नाम :- मुखकार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत नेहा मीना, आनंदम सहयोगी विजय मेवाड़ा,समन्वयक अरविंद शर्मा
स्‍थल :- Indore
03 Jul, 2019

मध्यप्रदेश के अध्यात्म विभाग के अंतर्गत राज्य आनंद संस्थान प्रदेश में नागरिकों को आनंद की अनुभूति तथा अपने आंतरिक व बाह्य आनंद को समझने के लिए अनेक कार्यक्रम जैसे अल्प विराम, आनंद उत्सव, आनंद सभा, नेकी की दीवार (आनंदम) एवं आनंद क्लब आदि संचालित कर रहा है। जो कि देशभर में अपनी तरह की एक अनूठी पहल है। इसी तारतम्य में इंदौर जिला स्तरीय आनंदक सम्मेलन कलेक्टरेट स्थित देवी अहिल्या बाई होल्कर सभागृह  में मुख्यकार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत एवम नोडल अधिकारी अध्यात्म विभाग श्रीमती नेहा मीना , अनुविभागीय अधिकारी प्रतुल सिन्हा की गरिमामय उपस्थिति में सम्पन्न हुआ।जिसमे 118आनंदकों ने सहभागिता की।

राज्य आनंद संस्थान ने स्वैच्छिक आधार पर बगैर किसी लाभ की प्रत्याशा में कार्य करने वाले व्यक्तियों को आनंदक के रूप में पंजीकृत किया है। उन्ही आनंदकों हेतु जिला स्तरीय आनंदक सम्मेलन आयोजत हुआ, आनंदक सम्मेलन की शुरुआत हास्य योगा से हुई तो कलेक्टरेट सभागार ठहाकों और गीतों से गुंजीत हुआ आनंद इतना था कि आनंदक खुशी का इज़हार करने से खुद को रोक न सके।नोडल अधिकारी श्रीमती नेहा मीना ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा दूसरों की,मदद करने में वास्तव में आनंद की अनुभूति होती है,हमारा सामाजिक दायित्व है हमें कुछ समय समाज सेवा में भी देना चाहिए।अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी मधुलिका शुक्ला ने कहा राज्य आनंद संस्थान लोगों को सही दिशा और आनंद की अनुभूति करने का कार्य कर रहा है ऐसे में हम सभी का यह दायित्व है कि हम आनंद और खुशी का एहसास सभी को कराएं ।

अरविंद शर्मा द्वारा राज्य आनंद संस्थान का परिचय दिया गया ।आनंदम सहयोगी विजय मेवाड़ा द्वारा राज्य आनंद संस्थान द्वारा इंदौर जिले में राज्य आनंद संस्थान की स्थापना से आज तक कि गई गतिविधियों आनंद उत्सव, आनंदम स्थल, (नेकी की दीवार),आनंदम अल्पविराम को वीडियो प्रेजेंटेशन के माध्यम से विस्तारपूर्वक स्पष्ट किया। राज्य आनंद संस्थान के मुकेश करुआ ने फ्रीडम ग्लास टूल को अपने जीवन से जोड़कर प्रदर्शित किया, के बी मनसारे ने 10 मिनिट का शांत समय दिया गया,तत्पश्चात गुब्बारे फ़िल्म का प्रर्दर्शन कर विजय मेवाड़ा ने अपने पारिवारिक रिश्तों में आई कड़वाहट को कैसे अल्पविराम के माध्यम से शांत समय लेकर अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनने और उसका अनुसरण कर कैसे मधुरता में परिवर्तित किया और कहा अल्पविराम हमारे अन्तर्मन का आईना है,जीवन की एक घटना का वृत्तांत बताते हुए कहा मेरे साथ 5 वर्ष पूर्व एक सड़क हादसा हुआ,और कुछ लोगों ने मुझे बेहोशी की हालत में हॉस्पिटल में एडमिट कराकर मेरी प्राणरक्षा की,में हर व्यक्ति की मदद यही सौंचकर करता हूँ कि शायद यह वही व्यक्ति हो जिसने मेरी जान बचाई हो। लोगों ने प्रभावित होकर स्वतः ही तालियों की गड़गड़ाहट से अभिवादन किया। -हमने 10 समूह बनाकर जब समूह चर्चा में उनके कार्यो के साथ साथ दो संकल्प निर्धारण का लक्ष्य दिया तो अन्य सामाजिक मुद्दो के साथ साथ एक समूह ने यह भी संकल्प लिये कि 1-सभी आनंदकों ने संकल्प लिया-जब भी किसी से मिलेंगे चेहरे पर मुस्कुराहट होगी, 2-गुस्सा आने पर हम शांत रहेंगे और मन शांत होने पर ही बात करेंगे।कार्यक्रम में प्रदेश स्तर पर राज्य आनंद संस्थान द्वारा आयोजित वीडियो प्रतियोगिता में द्वितीय पुरुस्कार विजेता इंदौर के मोहर सिंह कुशवाह को राज्य आनंद संस्थान द्वारा 15000 रु का पुरस्कार दिया गया ।साथ ही श्रेष्ठ कार्य करने वाले आनंदकों को शील्ड एवम सभी सहभागियों को प्रोत्साहन स्वरूप प्रमाणपत्र दिए।आनंदकों ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए इस आयोजन को समाज हित मे एक सार्थक प्रयास बताया। विजय मेवाड़ा द्वारा एक मिनिट में सबसे बड़ा गुब्बारा फूलाने का टास्क दिया गया जिसमें खूब ठहाके ओर आनद की अनुभूति हुई।


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