List of Eligible Candidates from previous recruitment advertisement        List of Non-Eligible Candidates from previous recruitment advertisement       • ऑनलाइन कौर्स : ए लाइफ ऑफ़ हैप्पीनेस एंड फुलफिल्मेंट

आनंद कैलेण्डर का लोकार्पण – “आनन्दित रहने के लिये अमीर होना जरूरी नहीं, खुशहाली हमारी सोच पर निर्भर करती है” श्री दलाई लामा का ‘आनंदित रहने की कला’ पर व्याख्यान

स्‍थल :- Bhopal
20 Mar, 2017

अपने जीवन में आनन्द लाने के लिये जरूरी है कि हम दूसरों की भलाई के बारे में सोचे और सभी के प्रति करूणा और प्रेम का भाव रखें। यह बात बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा ने 19 मार्च, 2017 को विधानसभा सभागार में संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित ‘’आनन्दित रहने की कला’’ विषय पर आयोजित कार्यक्रम में अपने व्याख्यान में कही। इस दौरान विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीतासरण शर्मा, वित्त मंत्री श्री जयंत मलैया, सहकारिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री विश्वास सारंग सहित विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधि, विधायक और गणमान्य नागरिक मौजूद थे। कार्यक्रम में दलाई लामा ने राज्य आनंद संस्थान द्वारा तैयार किय गये ‘’आनन्द केलेण्डर’’ का लोकार्पण किया। यह केलेण्डर मध्यप्रदेश राज्य आनंद संस्थान की वेबसाइट www.anandsansthanmp.in पर भी उपलब्ध है।

नोबेल शांति पुरस्‍कार से सम्‍मानित दलाई लामा ने मध्यप्रदेश सरकार द्वारा नागरिकों के जीवन में खुशहाली लाने के उददेश्य से आनन्द विभाग गठित किये जाने की सराहना की। उन्होंने स्कूलों में प्राथमिक स्तर से ही शिक्षा के पाठ्यक्रम में बच्चों को प्रेम, करूणा तथा सर्वधर्म समभाव जैसे विषयों को शामिल किये जाने की आवश्यकता बताई।

धर्मगुरु दलाई लामा ने कहा कि आधुनिक शिक्षा पद्धति भौतिक विकास की शिक्षा ही देती है जबकि मानव के आंतरिक सुख की प्राप्ति के लिये आध्यात्म से संबंधित शिक्षा दिया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि बच्चों की पहली शिक्षक उनकी माँ होती है तथा माँ ही बच्चों को प्रेम, करूणा और स्नेह का पहला पाठ सिखाती है। उन्होंने कहा कि खुशहाली और आनन्द का अमीरी या गरीबी से कोई संबंध नहीं है। खुशहाली हमारे सोच पर निर्भर करती है। धर्मगुरु दलाई लामा ने कहा कि सभी को जाति प्रथा को हतोत्साहित करना चाहिये। समाज में कोई छोटा या बड़ा नहीं होना चाहिये, सभी को बराबर सम्मान मिलना चाहिये। धर्मगुरु दलाई लामा ने कहा कि क्रोध व ईष्र्या से सभी को बचना चाहिये। उन्होंने अपनी माँ की याद करते हुए कहा कि मेरी माँ बहुत दयालु थी तथा माँ ने ही दया व प्रेम के संस्कार मुझे दिये हैं। दलाई लामा ने कहा कि सभी को हर उम्र में अध्ययन जरूर करना चाहिये। उन्होंने बताया कि वे 82 वर्ष की आयु होने के बावजूद आज भी नियमित रूप से पुस्तकों का अध्ययन करते हैं।

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीतासरण शर्मा ने राज्य सरकार द्वारा गठित आनंद विभाग और उसकी गतिविधियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि उनके अध्यक्षीय कार्यकाल में श्री दलाई लामा के विधानसभा के सभागार में आगमन पर उन्हें खुशी है। श्री शर्मा ने कहा कि संतों के सान्निध्य से आनंद विभाग अपने उददेश्य को सार्थक कर रहा है।

अंत में आभार प्रदर्शन सहकारिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) मंत्री श्री विश्वास सारंग ने किया।


फोटो :-

         

वीडियो:-

Video - 1