आनंदक और उनसे अपेक्षाऐं

  1. ‘‘आनंदक’’ से संस्थान की निम्‍न अपेक्षायें हैं :-
    • वह अपने अन्‍य सामान्‍य कार्य कलापों के अतिरिक्‍त राज्य आनंद संस्थान की गतिविधियों को स्‍वप्रेरणा से तथा बिना किसी मानदेय के संचालन करने के लिये तैयार हो ।
    • संस्थान द्वारा जो प्रशिक्षण दिया जावेगा उस पर समय पर उपस्थित होंगे तथा उसी प्रशिक्षण के अनुरूप कार्य करेंगे।
    • राज्‍य आनंद संस्‍थान की बेवसाईट का समय समय पर अवलोकन करते रहेंगे ताकि आनंदकों के लिये प्रसारित निर्देशों से अवगत रहें।
    • संस्‍थान को समय समय पर ऐसा फीड बैक देते रहेंगे जिससे उसकी गतिविधियों में निरंतर सुधार आ सके।
    • अगर उन्‍हें प्रशिक्षण के अनुसार कार्य करने में कठिनाई का अनुभव हो तो उससे हतोत्साहित नहीं होंगे।
    • अपने कर्तव्‍यों तथा विचारों से दूसरों के लिये सकारात्‍मक उदाहरण बनेंगे। (Be the change that you want) अर्थात दूसरों के जीवन जीने की शैली में जो परिवर्तन लाने का प्रसास करेंगे उस परिवर्तन को पहले अपने जीवन में अनुभव करेंगे ताकि वह स्‍वत: उदाहरण बन सके।
    • अन्‍य व्‍यक्तियों को भी आनंद गतिविधियों में भाग लेने के लिये प्रेरित करेंगे।
  2. पंजीकरण के दौरान आनंदक संचालित कार्यक्रम जैसे आनंद उत्‍सव/ आनंद सभा/ आंनदम में से किसी भी कार्यक्रम में सहभागिता का विकल्‍प चुन सकेंगे।
  3. पंजीकृत आनंदकों में से चयनित को कार्यक्रम में सहयोग प्रदान करने के लिये आवश्‍यक प्रशिक्षण दिया जावेगा। शेष आनंदक कार्यक्रम में सक्रिय भाग ले सकेंगे।