*अल्प विराम में पद और कद भूल कर शामिल हो रहे चतुर्थ श्रेणी से लेकर प्रथम श्रेणी के अधिकारी कर्मचारी

प्रेषक का नाम :- लखन लाल असाटी आनंदम सहयोगी जिला छतरपुर
स्‍थल :- Chhatarpur

*कलेक्ट्रेट के सभी अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए अल्पविराम प्रशिक्षण अनिवार्य*
*छतरपुर*। आनंद विभाग के निर्देशानुसार प्रत्येक जिले के कलेक्टर कार्यालय में कार्यरत सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए अल्पविराम कार्यक्रम के 7-7 प्रशिक्षण अनिवार्य किए गए हैं। छतरपुर कलेक्टर रमेश भंडारी ने पहले चार सत्रों हेतु आदेश जारी कर दिए हैं। अधिकारियों-कर्मचारियों के कार्यव्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन लाने हेतु उन्हें मौन रहकर आत्मा की आवाज सुनने का अभ्यास कराया जाना अल्पविराम का प्रमुख हिस्सा है। प्रशिक्षण कार्यक्रम में *चतुर्थ श्रेणी से लेकर प्रथम श्रेणी तक केे कर्मचारी अधिकारी अपने पद और कद को भूलकर एक साथ बैठते हैं।*
कलेक्ट्रेट कार्यालय छतरपुर के लगभग 180 अधिकारियों-कर्मचारियों के 6 समूह बनाए गए हैं। प्रत्येक समूह में 30 अधिकारी कर्मचारी शामिल हैं। गुरुवार को कलेक्ट्रेट सभा कक्ष में कोषालय, पेंशन कार्यालय एवं जिला योजना एवं सांख्यिकी कार्यालय के 14 कर्मचारियों ने अल्पविराम का प्रशिक्षण लिया। उन्होंने 20 मिनिट मौन रहकर अपनी आत्मा की आवाज सुनने का अभ्यास किया। *आनंदम सहयोगी लखन लाल असाटी ने प्रशिक्षण सत्र का संचालन करते हुए सभी से अपेक्षा की कि वह मौन रहकर इस बात का चिंतन करें कि उनके जीवन में वर्तमान में जो आनंद है उसके पीछे किन किन लोगों का त्याग है। यह भी चिंतन किया जाए कि हम दूसरों के जीवन को आनंदित करने के लिए क्या कर रहे हैं*हमारा कार्यालयीन कार्यव्यवहार कैसा है, क्या वाकई यही हमारे जीवन का उद्देश्य है। अल्पविराम के बाद अनुपम द्विवेदी ने बताया कि वह पांचवीं तक पिपट में पढ़े हैं। छठवीं में वे जब छतरपुर आए तो सुदर्शन सर ने उनके जीवन को ही बदल दिया। आज सुदर्शन सर विदेश में हैं। पर वह उन्हें पत्र लिखकर अपने परिवार की ओर से धन्यवाद ज्ञापित करेंगे। सुदर्शन सर के कारण ही वह अत्यंत कमजोर होने के बावजूद गणित और अंग्रेजी विषयों में मजबूत बने। सहायक पेंशन अधिकारी राजेश रूपोलिहा ने कहा कि देवेन्द्र नगर में जब वह पढ़ते थे तो घुवारा निवासी जोशी सर ने उन्हें प्रेरणा दी जिस कारण आज वह इस मुकाम पर हैं। इस मौके पर कमालुद्दीन खान, बीएल अहिरवार, गनेश सेठ, जीएस विश्वकर्मा आदि ने भी विचार व्यक्त किए। *लखन लाल असाटी छतरपुर*


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